कोरबा। कोरबा शहर और आसपास के क्षेत्रों में 40 से 45 वर्ष पुराने पुलों की जर्जर स्थिति अब गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। शहर के प्रमुख मार्गों पर स्थित कई पुलों के लिए अब तक कोई ठोस योजना नहीं बन सकी है। इसी बीच रिंग रोड स्थित ढेंगुरनाला, बेलगिरी और कचांदी नाले पर जिला खनिज न्यास (DMF) मद से नए पुलों के निर्माण की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए नए सिरे से सर्वे कार्य कराया जा रहा है।
वहीं सीपत–बलौदा–उरगा–हाटी राष्ट्रीय राजमार्ग पर हसदेव नदी पर बना कुदुरमाल पुल 29 नवंबर से बंद है। पुल का मध्य हिस्सा करीब 8 इंच तक धंस जाने के बाद इसे यातायात के लिए असुरक्षित घोषित किया गया।
प्रशासन ने लोड टेस्टिंग कराने का निर्णय तो लिया, लेकिन इसके लिए आवश्यक 25 लाख रुपए का फंड सेतु निर्माण विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। मरम्मत और वैकल्पिक मार्ग को लेकर भी अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका है।
कुदुरमाल पुल बंद होने से चार जिलों बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, जशपुर सहित रांची जाने वाले यातायात का दबाव कोरबा शहर की सड़कों पर आ गया है।
फिलहाल भारी कोयला लोड वाहन सर्वमंगला पुल होते हुए बालको रिंग रोड से उरगा की ओर भेजे जा रहे हैं, जिससे शहर में ट्रैफिक दबाव बढ़ गया है।
सेतु निर्माण विभाग ने कुदुरमाल में नया पुल बनाने के लिए लगभग 21 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा है, जिसे बजट में शामिल करने की मांग की गई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि फंड की स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू हो पाएगी।
इधर, बालको प्रबंधन ने ढेंगुरनाला और बेलगिरी नाला पुल की मरम्मत के लिए 80 लाख रुपए दिए हैं, जिसका टेंडर राज्य शासन को भेजा जा चुका है। संभावना है कि गर्मी के मौसम में मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा।
कुल मिलाकर,कोरबा के पुराने पुलों की हालत और फंड की कमी ने यातायात व्यवस्था को मुश्किल में डाल दिया है, जबकि नए पुलों की उम्मीद फिलहाल प्रस्ताव और मंजूरी के बीच अटकी हुई है।
Editor – Niraj Jaiswal
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