गणेश चतुर्थी का उत्सव शुरू, भव्य प्रतिमाओं की स्थापना के साथ उत्साह चरम पर

कोरबा। भाद्रपद चतुर्थी से कोरबा में प्रथम पूज्य भगवान गणपति का 11 दिवसीय उत्सव गणेश चतुर्थी धूमधाम से शुरू हो गया। इस अवसर पर दुर्लभ संयोगों के बीच घरों, संस्थानों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाओं की परंपरागत स्थापना की जा रही है। सुबह से शुरू हुआ यह सिलसिला देर रात तक जारी रहेगा।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश ने अपने माता-पिता की परिक्रमा कर परिवार और समाज के महत्व को रेखांकित किया था, जिसके कारण उन्हें प्रथम पूज्य देव का दर्जा प्राप्त है। शास्त्रीय मत के अनुसार, भाद्रपद चतुर्थी को प्रतिमा स्थापना का शुभ मुहूर्त पूरे दिन रहता है, जिसमें किसी दोष की संभावना नहीं होती। कोरबा के प्रमुख स्थानों पर बड़ी समितियों ने विशाल और आकर्षक प्रतिमाओं की स्थापना की है। वेद मंत्रों और जयकारों के बीच पुरोहितों ने स्थापना की प्रक्रिया पूरी की। इन पंडालों में कई आकर्षक आयोजनों की योजना बनाई गई है, जो पूरे उत्सव के दौरान लोगों का ध्यान आकर्षित करेंगे।

शहरी, कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों की संख्या में सामान्य आकार की प्रतिमाएं घरों में स्थापित की गई हैं। सभी के पीछे एक ही उद्देश्य है- जीवन में सुख, समृद्धि और विघ्नों से मुक्ति की कामना।

कटघोरा में ‘कटघोरा के राजा’ की भव्य स्थापना

कटघोरा नगर में लगातार दूसरे वर्ष सार्वजनिक पूजा समिति ने मुंबई की माया नगरी की तर्ज पर सबसे विशाल गणेश प्रतिमा स्थापित की है, जिसे ‘कटघोरा के राजा’ नाम दिया गया है। भव्य पंडाल में विराजित इस प्रतिमा के साथ अगले 11 दिनों तक विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों की योजना है। पिछले साल अयोध्या के राम मंदिर की थीम पर बने पंडाल ने लोगों का ध्यान खींचा था, और इस बार भी समिति ने भव्यता के साथ उत्सव को खास बनाने की पूरी तैयारी की है।

उत्सव में श्रद्धा और उत्साह का संगम

कोरबा और कटघोरा में गणेश चतुर्थी का उत्सव श्रद्धा और उत्साह का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रहा है। भक्तों का मानना है कि भगवान गणेश की कृपा से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। यह उत्सव न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करता है।