कोरबा। हिंदी मासानुसार फाल्गुन माह का आरंभ 13 फरवरी से हो गया है जो 14 मार्च तक रहेगा। आयुर्वेद चिकित्सक डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि भारतीय परंपरा में ऋतुचर्या यानी ऋतुनुसार आहार-विहार करने की परंपरा रही है। यह संस्कार हमें विरासत में मिला है। इस अंतराल में हमें अपने आहार-विहार पर विशेष ध्यान देना चाहिये।
फागुन के महीने में धीरे-धीरे गर्मी की शुरुआत हो जाती है और सर्दी कम होने लगती है। इस माह में कफ रोग बुखार, सर्दी खांसी एवं त्वचा संबंधी रोग खाज, खुजली आदि रोगों की संभावना बढ़ जाती है। इसलिये कफवर्धक आहार-विहार जैसे दिन में सोना एवं कच्चे खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिये। इस माह में पका हुआ भोजन ही श्रेष्ठ होता है।
फाल्गुन माह में चने का सेवन नहीं करना चाहिये। इसके सेवन करने से व्यक्ति बीमार तो पड़ ही सकता है। फाल्गुन माह में रात्रि में भोजन के समय अनाज का प्रयोग कम से कम करें। फाल्गुन माह में प्रतिदिन 4-5 नीम के कोमल पत्तियों का सेवन करना चाहिये इससे शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलने में मदद मिलती है।
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