भारत विश्वगुरू था और हमेशा रहेगा : बीके रुक्मणी


कोरबा। प्रजापिता ब्रम्हकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के टीपी नगर स्थित विश्व सद्भावना भवन में शिक्षक दिवस के अवसर पर भारत को विश्वगुरू बनाने में शिक्षक की अहम भूमिका विषय पर संगोष्ठी कार्यक्रम आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में अतिथि के तौर पर महापौर राजकिशोर प्रसाद, सेवाकेंद्र प्रभारी बी.के. रूक्मणी, प्राचार्य डॉ. किरण चौहान कमला नेहरू महाविद्यालय, सहायक प्राध्यापक अटल विहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय आशा आजाद उपस्थिति थे। मंचस्थ अतिथियों के द्वारा सर्वप्रथम डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के तेल्यचित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलन किया गया।


इस मौके पर महापौर राजकिशोर प्रसाद ने कहा कि शिक्षक अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए छात्रों के भविष्य गढऩे का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति के पास क्षमता है तो उस क्षमता का उपयोग समाज को लाभान्वित करने में किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में सभी अतिथियों ने अपने उद्बोधन दिए। इस संगोष्ठी में सार यह निकला कि भारत को विश्वगुरू बनाने की जरूरत नहीं है वो विश्वगुरू था और इसके लिए राजयोग अर्थात् मेडिटेशन को महत्वपूर्ण बताया गया। बी.के. रुक्मणि ने कहा कि भारत वो देश है जहां तैतीस करोड़ देवी-देवता वास करते थे जिसका प्रमाण है कि आज हर घर में देवी देवताओं की तस्वीरे है जिनकी हम पूजा करते हैं।

उन्होंने समस्त शिक्षको से राजयोग सीखने की अपील की ताकि बच्चों को और अधिक संस्कारवान बनाया जा सके।

बी.के बिन्दू ने एकाग्रता को महत्वपूर्ण बताया। अंत मे ब्रम्हकुमारियों द्वारा  अतिथियों को श्रीफल व पौधा भेंट किया गया।

कार्यक्रम में संजय जैन, बी.के. बिन्दू, विवेक लाण्डे, संतोष यादव, एफ.आर. पटेल, अनिता, पुरूषोत्तम पटेल, मंजू तिवारी, साधना शर्मा, सुरेश द्विवेदी, कमल कर्माकर, उदयनाथ साहू, रामनाथ सोनी, सरिता चौधरी, कौशल कुलमित्र, मंजू, शिवानी उपस्थित थे।