कुसमुंडा खदान प्रभावित बेरोजगारों के रोजगार की मांग, 4 नवंबर को बंद की चेतावनी

छत्तीसगढ़ किसान सभा ने कलेक्टर और एसईसीएल प्रबंधन को सौंपा ज्ञापन; खदान बंद कराने के साथ कोयला परिवहन रोकने का ऐलान

कोरबा।कुसमुंडा कोयला खदान के विस्तार से प्रभावित गांवों के बेरोजगारों को रोजगार में प्राथमिकता देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ किसान सभा ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने इस संबंध में कलेक्टर और एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपा है। मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने पर 4 नवंबर को कुसमुंडा खदान बंद कराने और कोयला परिवहन रोकने के आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

छत्तीसगढ़ किसान सभा का कहना है कि कुसमुंडा खदान के विस्तार के लिए पूर्व में और वर्तमान में आसपास के कई गांवों की जमीन अधिग्रहित की गई है। इससे स्थानीय आबादी प्रभावित हुई है, लेकिन खनन प्रभावित परिवारों के बेरोजगारों को अपेक्षित रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं।

संगठन ने आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग कंपनियां 70 और 30 प्रतिशत के प्रावधान का हवाला देने के बावजूद स्थानीय युवाओं को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दे रही हैं और दूसरे जिलों व राज्यों के लोगों को रोजगार दिया जा रहा है।

आउटसोर्सिंग कंपनियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग

संगठन ने ज्ञापन में मांग की है कि खदान विस्तार के लिए जिन गांवों की जमीन अधिग्रहित की गई है, वहां के बेरोजगारों को आउटसोर्सिंग कंपनियों में पहली प्राथमिकता दी जाए। इसके साथ ही खनन प्रभावित जिले के स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है।

किसान सभा ने यह मुद्दा भी उठाया कि किसी आउटसोर्सिंग कंपनी का काम समाप्त होने पर वहां कार्यरत कर्मचारियों को बेरोजगार न होना पड़े। संगठन की मांग है कि नई कंपनी को काम मिलने पर पहले से कार्यरत कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर दोबारा रोजगार दिया जाए। एक निजी कंपनी का काम बंद होने से बेरोजगार हुए कर्मचारियों का मामला भी ज्ञापन में शामिल किया गया है।

खदान बंद करने और कोयला परिवहन रोकने की चेतावनी

छत्तीसगढ़ किसान सभा ने चेतावनी दी है कि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर 4 नवंबर को कुसमुंडा खदान बंद कराने के साथ कोयला परिवहन बाधित करने के लिए आंदोलन किया जाएगा। संगठन के अनुसार, कुसमुंडा थाना क्षेत्र, बरमपुर और सर्वमंगला मंदिर के पास से गुजरने वाले कोयला परिवहन को रोकने की योजना है।

संगठन ने प्रस्तावित आंदोलन की जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन पर तय करने की बात कही है। अब इस मामले में प्रबंधन की पहल और मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।