40 साल बाद भी रोजगार-पुनर्वास की आस,भू-विस्थापितों ने पारित किए अहम प्रस्ताव,दीपका क्षेत्र के पांच गांवों के प्रभावितों का महासम्मेलन

स्वरोजगार के लिए टेंडर सीमा 5 से बढ़ाकर 20 लाख करने का प्रस्ताव

कोरबा। भूमि अधिग्रहण और विस्थापन के करीब चार दशक बाद भी रोजगार, मुआवजे और पुनर्वास से जुड़ी समस्याएं लंबित होने का मुद्दा दीपका क्षेत्र के भू-विस्थापितों के महासम्मेलन में प्रमुखता से उठा। ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के तत्वावधान में 22 अक्टूबर को ग्राम पंचायत अंडीकछार के टिनठिकिया स्थान पर आयोजित महासम्मेलन में सुवाभोड़ी, सिरकी खुर्द, चैनपुर, झाबर और बेलटिकरी के प्रभावित ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में विभिन्न मांगों पर चर्चा कर प्रस्ताव पारित किए गए।

समिति ने आरोप लगाया कि एसईसीएल की दीपका परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण और विस्थापन के वर्षों बाद भी प्रभावित परिवारों को रोजगार, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। सम्मेलन में ग्रामीणों ने लंबित समस्याओं के निराकरण के लिए एकजुट होकर आवाज उठाई और आगे के आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की।

लंबित मुआवजा और रोजगार के मुद्दे प्रमुख
महासम्मेलन में ग्राम सुवाभोड़ी की समस्याओं पर विशेष चर्चा हुई। इसमें लंबित मुआवजे और परिसंपत्तियों का शीघ्र भुगतान, पांच लाख रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि तथा बसाहट पात्रता से जुड़े दस्तावेजों में नाम और जाति संबंधी त्रुटियों को सुधारने की मांग शामिल रही। प्रभावित परिवारों के स्थानीय युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराने का मुद्दा भी उठाया गया।

पुनर्वासित गांवों में मूलभूत सुविधाओं की मांग
सिरकी खुर्द, चैनपुर, झाबर और बेलटिकरी सहित पुनर्वासित क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी सम्मेलन में उठा। ग्रामीणों ने भूमि पट्टे आवंटित करने के साथ पक्की सड़क, नाली, पुल-पुलिया, गार्डन, सामुदायिक भवन, मुक्तिधाम, तालाब और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।

सम्मेलन में पुनर्वास नीति के तहत पात्र परिवारों को मिलने वाले लाभों का पारदर्शी तरीके से निराकरण करने पर भी जोर दिया गया। प्रभावितों का कहना है कि पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं का समाधान होने से ही परिवारों को स्थायी राहत मिल सकेगी।

टेंडर सीमा 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव
भू-विस्थापितों के स्वरोजगार और ठेकेदारी से जुड़े अधिकारों पर भी चर्चा की गई। सम्मेलन में वैकल्पिक स्वरोजगार के लिए निर्धारित पांच लाख रुपये की टेंडर सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इसके साथ ही स्थानीय भू-विस्थापित ठेकेदारों के साथ कथित भेदभाव समाप्त करने की मांग उठाई गई।

समिति का कहना है कि स्थानीय प्रभावितों को स्वरोजगार के अवसर मिलने से वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगे। सम्मेलन में भू-विस्थापित कोटे के तहत मिलने वाले अवसरों और अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया।

आगे के संघर्ष की तैयारी करेगी समिति
ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने प्रभावित गांवों के निवासियों, महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं से अपने अधिकारों के लिए एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने देश के ऊर्जा उत्पादन के लिए अपनी जमीन दी, उन्हें आज भी रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

कुलदीप ने कहा कि महासम्मेलन में विभिन्न समस्याओं पर प्रस्ताव पारित किए गए हैं। इन मांगों को लेकर एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ आगामी संघर्ष की रणनीति तैयार की जाएगी। अब प्रभावित ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि प्रबंधन लंबित मांगों के निराकरण के लिए क्या कदम उठाता है।