छत्रपाल सिंह कंवर ने अपनाई आधुनिक खेती की राह,ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और सब्जी उत्पादन से बढ़ी आमदनी
कोरबा। खेती में आधुनिक तकनीक और फसल विविधीकरण अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। कोरबा जिले के कटघोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम धनरास के किसान छत्रपाल सिंह कंवर ने इसे अपनी मेहनत से साबित किया है। कभी केवल धान की खेती पर निर्भर रहने वाले छत्रपाल की सालाना आय 70 से 80 हजार रुपये तक सीमित थी। उद्यानिकी विभाग की योजनाओं से अनुदान का लाभ मिलने के बाद उन्होंने खेती का तरीका बदला और धान के साथ मौसमी सब्जियों का उत्पादन शुरू किया। ड्रिप सिंचाई, प्लास्टिक मल्चिंग और आधुनिक कृषि उपकरणों के उपयोग से उनकी वार्षिक आय बढ़कर 4 से 5 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
परंपरागत खेती से आगे बढ़ने की बनाई योजना
ग्राम धनरास निवासी छत्रपाल सिंह कंवर पहले परंपरागत तरीके से धान की खेती करते थे। सिंचाई के सीमित साधन, आधुनिक उपकरणों की कमी और तकनीकी जानकारी के अभाव में उनकी आमदनी कम रहती थी। खेती पर मेहनत और समय लगाने के बावजूद सालभर की कमाई 70 से 80 हजार रुपये के आसपास ही होती थी।
आमदनी बढ़ाने के लिए उन्हें खेती में बदलाव और बेहतर संसाधनों की जरूरत महसूस हुई। इसी दौरान उद्यानिकी विभाग की योजनाओं से जुड़कर उन्हें आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने का अवसर मिला।
तीन योजनाओं से मिला आधुनिक संसाधनों का लाभ
वर्ष 2025-26 में छत्रपाल सिंह कंवर को प्रधानमंत्री सूक्ष्म सिंचाई योजना, राष्ट्रीय बागवानी मिशन और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत विभिन्न कृषि सुविधाओं के लिए अनुदान मिला। इसमें ड्रिप सिंचाई संयंत्र, फेंसिंग, प्लास्टिक मल्चिंग, पावर टिलर और पावर स्प्रेयर जैसी सुविधाएं शामिल थीं।
इन संसाधनों का उपयोग कर उन्होंने खेती को नए तरीके से व्यवस्थित किया। धान के साथ मौसमी सब्जियों की खेती शुरू करने से उन्हें अलग-अलग फसलों के उत्पादन का अवसर मिला। आधुनिक उपकरणों ने कृषि कार्यों को आसान बनाने में मदद की, वहीं ड्रिप सिंचाई से पानी का बेहतर प्रबंधन संभव हुआ।
आधुनिक तकनीक से बढ़ी आमदनी, खेती बनी बेहतर आजीविका का साधन
छत्रपाल के मुताबिक, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग अपनाने से फसलों की देखभाल में सुविधा मिली। पावर टिलर और पावर स्प्रेयर के उपयोग से कृषि कार्यों में भी मदद मिली।
खेती में इन बदलावों के साथ फसल उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार हुआ, जिसका असर उनकी आमदनी पर दिखाई देने लगा।
पहले जहां उनकी वार्षिक आय 70 से 80 हजार रुपये थी, वहीं अब वे सालाना 4 से 5 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं। इस बदलाव ने खेती को उनके परिवार के लिए बेहतर आर्थिक सहारे के रूप में स्थापित करने में मदद की है।
दूसरे किसानों को भी आधुनिक खेती अपनाने की सलाह
अपनी सफलता के अनुभव साझा करते हुए छत्रपाल सिंह कंवर ने बताया, “पहले मैं केवल धान की खेती करता था। सिंचाई के पर्याप्त साधन और आधुनिक उपकरण नहीं होने से आमदनी सीमित रहती थी।
उद्यानिकी विभाग की योजनाओं से सहायता मिलने के बाद खेती को नए तरीके से करने का अवसर मिला। अब धान के साथ मौसमी सब्जियां भी उगा रहा हूं। ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और पावर टिलर से काम आसान हुआ है और फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार आया है। पहले सालभर में 70 से 80 हजार रुपये की आय होती थी, अब 4 से 5 लाख रुपये तक कमा पा रहा हूं।”
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों का लाभ मिलने से खेती के प्रति उनका नजरिया बदला है। अब वे गांव के दूसरे किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीक और विभिन्न फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने किसानों को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
योजनाओं के साथ तकनीक और मेहनत का मेल
छत्रपाल सिंह कंवर की कृषि यात्रा बताती है कि सिंचाई के बेहतर प्रबंधन,आधुनिक उपकरणों और फसल विविधीकरण से खेती में आय बढ़ाने के अवसर विकसित किए जा सकते हैं। उद्यानिकी विभाग की योजनाओं से मिले संसाधनों का उपयोग कर उन्होंने अपनी खेती में बदलाव किया और आमदनी बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की।
Editor – Niraj Jaiswal
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