एसईसीएल गेवरा प्रबंधन को भू-विस्थापितों का अल्टीमेटम,12 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन घेराव की चेतावनी

नरईबोध के प्रभावित किसानों और ग्रामीणों में आक्रोश, समझौते पर अमल नहीं होने पर खदान बंद कराने की दी चेतावनी

कोरबा। एसईसीएल गेवरा क्षेत्र में भू-विस्थापितों की मांगों और पूर्व में हुए समझौतों पर अमल नहीं होने का आरोप लगाते हुए ग्राम नरईबोध के प्रभावित किसानों एवं ग्रामीणों ने आंदोलन का ऐलान किया है।अमिला राकेश पटेल, पार्षद वार्ड क्रमांक 29 नरईबोध के नेतृत्व में आयोजित चर्चा-परिचर्चा में ग्रामीणों ने प्रबंधन के रवैये पर नाराजगी जताई। बैठक में चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार करते हुए एसईसीएल प्रबंधन को अल्टीमेटम नोटिस सौंपा गया है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर ठोस पहल नहीं होने पर 12 अक्टूबर 2026 से मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) कार्यालय गेवरा का अनिश्चितकालीन घेराव किया जाएगा। इसके बाद भी समाधान नहीं निकला तो गेवरा खदान का कामकाज बंद कराने की कार्रवाई की जाएगी।

त्रिपक्षीय बैठक में बनी सहमतियों पर अमल नहीं होने का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार, 17 अप्रैल 2026 को जिला प्रशासन, एसईसीएल प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी थी। इस संबंध में संदर्भ पत्र क्रमांक 2843, दिनांक 18 अप्रैल 2026 का हवाला देते हुए ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अब तक सहमतियों के अनुरूप कोई ठोस और सार्थक कार्रवाई नहीं की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद नए अधिकारी अपने स्तर पर नियम-कायदे लागू कर रहे हैं, जिससे नौकरी, मुआवजा, प्लॉट आवंटन और पुनर्वास से जुड़े मामले उलझ रहे हैं। इसके कारण प्रभावित किसानों और भूमिहीन परिवारों को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पहले सीजीएम कार्यालय का घेराव, फिर खदान बंद कराने की चेतावनी
बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से दो चरणों में आंदोलन करने का निर्णय लिया।


पहला चरण: ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 17 अप्रैल को हुए समझौते पर तत्काल लिखित और पारदर्शी कार्रवाई शुरू नहीं की गई, तो 12 अक्टूबर 2026 से मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) कार्यालय गेवरा का अनिश्चितकालीन घेराव कर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

दूसरा चरण: ग्रामीणों के मुताबिक, पहले चरण के आंदोलन के बाद भी प्रबंधन की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होने पर गेवरा कोयला खदान का कामकाज पूरी तरह बंद कराने का कदम उठाया जाएगा।

आंदोलन से होने वाले नुकसान के लिए प्रबंधन-प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार
ग्रामीणों ने कहा है कि उनकी मांगों की अनदेखी के कारण आंदोलन की स्थिति बन रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने, किसी अप्रिय घटना या वित्तीय नुकसान की स्थिति में एसईसीएल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार होंगे।

फिलहाल नरईबोध के प्रभावित किसानों और ग्रामीणों ने प्रबंधन से पूर्व में हुई सहमतियों पर ठोस कार्रवाई शुरू करने की मांग की है। अब देखना होगा कि निर्धारित तारीख से पहले प्रबंधन की ओर से कोई पहल होती है या भू-विस्थापित अपने घोषित आंदोलन पर आगे बढ़ते हैं।