पहली छमाही में 76.9 मिलियन टन उत्पादन और 89.9 मिलियन टन डिस्पैच; मानसून के बाद खदानों में बढ़ी रफ्तार
कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कोयला उत्पादन और प्रेषण के क्षेत्र में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है। इस दौरान कंपनी ने 89.9 मिलियन टन कोयले का प्रेषण किया, जिसमें से 70.21 मिलियन टन कोयला पावर सेक्टर को उपलब्ध कराया गया। यह कंपनी के कुल कोयला प्रेषण का करीब 78 प्रतिशत है। वहीं, पहली छमाही में एसईसीएल का कुल कोयला उत्पादन 76.9 मिलियन टन रहा।
पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में एसईसीएल के कोयला प्रेषण में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में कंपनी ने 65.96 मिलियन टन कोयले का डिस्पैच किया था। इसी तरह उत्पादन में भी 5.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है।
195 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एसईसीएल को 195 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है। पहली छमाही में 76.9 मिलियन टन उत्पादन के बाद कंपनी को वित्त वर्ष की शेष अवधि में करीब 118.1 मिलियन टन कोयला उत्पादन करना होगा। ऐसे में आगामी महीनों में उत्पादन और डिस्पैच की रफ्तार बनाए रखना कंपनी के लिए अहम होगा।
पावर प्लांटों तक नियमित आपूर्ति पर जोर
मानसून के दौरान देश के कई ताप विद्युत संयंत्रों में कोयला स्टॉक पर दबाव की स्थिति को देखते हुए कोल इंडिया की सहायक कंपनियों ने आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सब-ग्रुप प्लान तैयार किया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में करीब 190 पावर प्लांटों की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 2,24,528 मेगावाट है। इनमें 60 से अधिक संयंत्रों में कोयला स्टॉक की स्थिति संतोषजनक नहीं बताई गई है।
पिटहेड पावर प्लांटों में स्टॉक की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि रेल मार्ग से कोयला प्राप्त करने वाले कई संयंत्रों में आपूर्ति और स्टॉक को लेकर दबाव बना हुआ है। इसे देखते हुए एसईसीएल ने एनसीएल, एमसीएल सहित कोल इंडिया की अन्य सहायक कंपनियों के साथ समन्वय कर सब-ग्रुप प्लान तैयार किया है। इसके तहत कोयला संकट वाले बिजली संयंत्रों तक नियमित और पर्याप्त मात्रा में कोयला पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
बारिश थमने के बाद कोरबा खदानों में बढ़ा उत्पादन
इधर, कोरबा जिले में पिछले पांच दिनों से बारिश थमने के बाद एसईसीएल की खदानों में कोयला उत्पादन में तेजी आई है। इस अवधि में कंपनी ने चार लाख टन से अधिक कोयला उत्पादन किया है। उत्पादन में सुधार का असर छत्तीसगढ़ के ताप विद्युत संयंत्रों को होने वाली कोयला आपूर्ति पर भी पड़ा है। डीएसपीएम, एचटीपीपी और मड़वा ताप विद्युत संयंत्रों को कोयला आपूर्ति बढ़ाई गई है।
एसईसीएल के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. सनीष चंद्र ने बताया कि रेल मार्ग के माध्यम से अधिक से अधिक कोयला डिस्पैच सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पावर प्लांटों को नियमित और अधिक मात्रा में कोयला उपलब्ध कराने के लिए सब-ग्रुप प्लान तैयार किया गया है और इसकी समीक्षा बैठकें भी की जा रही हैं। कंपनी का लक्ष्य उत्पादन बढ़ाने के साथ पावर सेक्टर को निर्बाध कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
Editor – Niraj Jaiswal
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