PM आवास में ‘जियो टैग’ का खेल? बरकोन्हा के तीन मामलों ने खड़े किए बड़े सवाल

मंजू बाई, धनश्याम राठिया और समारु राम यादव के आवासों में कथित एक जैसा पैटर्न; अधूरे मकानों को पोर्टल पर ‘पूर्ण’ दिखाकर भुगतान कराने का आरोप

कोरबा।प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन को लेकर कोरबा जिले के करतला विकासखंड की ग्राम पंचायत बरकोन्हा से एक साथ तीन मामलों में कथित जियो टैगिंग अनियमितता की शिकायत सामने आई है।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मौके पर आवास अधूरे होने के बावजूद सरकारी पोर्टल पर उन्हें पूर्ण दर्शाया गया और कथित रूप से दूसरे मकानों की तस्वीरें जियो टैग कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई।

मंजू बाई राठिया, धनश्याम राठिया और समारु राम यादव के नाम स्वीकृत आवासों को लेकर सामने आई शिकायतों में कथित तौर पर एक जैसी प्रक्रिया अपनाए जाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार तीनों आवासों की वास्तविक स्थिति और पोर्टल पर दर्ज तस्वीरों का स्थल स्तर पर मिलान कराया जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

तीन मामलों में एक जैसा पैटर्न होने का दावा
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित हितग्राहियों के वास्तविक निर्माणाधीन मकानों के बजाय अन्य आवासों की तस्वीरें जियो टैग कर पोर्टल पर अपलोड की गईं। इसके बाद आवासों को पूर्ण दर्शाते हुए प्रथम, द्वितीय और तृतीय किश्त की राशि जारी कर दी गई। कुछ मामलों में मनरेगा मजदूरी भुगतान दर्ज होने का भी दावा किया गया है।

हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि पोर्टल पर अपलोड तस्वीरें वास्तव में किस स्थान की हैं और उनका संबंधित हितग्राहियों के आवास से क्या संबंध है।

जियो टैग का तकनीकी मिलान बना जांच की अहम कड़ी
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल जियो टैग की वास्तविक लोकेशन को लेकर है। यदि पोर्टल पर उपलब्ध फोटो, जियो-लोकेशन, निर्माण की स्थिति और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड का तकनीकी एवं भौतिक सत्यापन कराया जाता है, तो शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकती है।

शिकायतकर्ताओं ने आवास मित्र, रोजगार सहायक, पंचायत सचिव सहित जनपद स्तर पर निगरानी से जुड़े अधिकारियों- कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है। आरोप है कि निर्माण की वास्तविक स्थिति का पर्याप्त सत्यापन किए बिना जियो टैगिंग और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

सिर्फ बरकोन्हा नहीं, पूरे करतला की जांच की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि बरकोन्हा में सामने आए तीन मामले यदि जांच में सही पाए जाते हैं तो पूरे करतला विकासखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पूर्ण दर्शाए गए आवासों की स्थल जांच कराना जरूरी होगा। साथ ही जियो टैगिंग और भुगतान रिकॉर्ड का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराने की मांग भी उठ रही है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पहले भी कथित जियो टैगिंग अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से जवाबदेही तय नहीं हो सकी।

‘जियो टैग सिंडिकेट’ का दावा, जांच से ही खुलेगा सच
एक साथ तीन आवासों में कथित तौर पर समान पैटर्न सामने आने के बाद शिकायतकर्ताओं ने इसे संगठित स्तर की अनियमितता की आशंका से जोड़ते हुए जांच की मांग की है। हालांकि इसे ‘सिंडिकेट’ या संगठित गड़बड़ी कहना जांच पूरी होने से पहले प्रमाणित तथ्य नहीं है।

शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन से तीनों मामलों की संयुक्त जांच, पोर्टल पर दर्ज जियो टैग का तकनीकी सत्यापन, स्थल निरीक्षण, भुगतान रिकॉर्ड की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

उनका यह भी दावा है कि बरकोन्हा सहित अन्य पंचायतों के कुछ और मामलों से संबंधित दस्तावेज उनके पास उपलब्ध हैं। यदि जांच में वर्तमान आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई और सरकारी राशि की वसूली का प्रश्न भी उठ सकता है।

अब बड़ा सवाल यही है क्या पोर्टल पर दर्ज तस्वीरें उन्हीं आवासों की हैं, जिनके नाम पर भुगतान हुआ? और यदि नहीं, तो जियो टैगिंग और भुगतान को किस स्तर पर सत्यापित किया गया?