धान की एक फसल से तीन फसल तक, आधुनिक खेती ने बदली गुरुचरण की तकदीर

उद्यानिकी विभाग की मदद से अपनाई ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक, 45 हजार की आय बढ़कर पहुंची ढाई से तीन लाख रुपये तक

कोरबा। कभी सिंचाई के साधन के अभाव में साल में सिर्फ एक फसल लेने वाले पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम नगौई बछेरा निवासी किसान गुरुचरण मरार ने आधुनिक खेती को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है। उद्यानिकी विभाग की योजनाओं और तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने ड्रिप सिंचाई, प्लास्टिक मल्चिंग और उन्नत पौध सामग्री का उपयोग शुरू किया। इसका परिणाम यह रहा कि अब वे वर्ष में दो से तीन फसलें ले रहे हैं और खेती से होने वाली उनकी आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

सिंचाई सुविधा नहीं होने से सीमित थी खेती

गुरुचरण पहले पारंपरिक तरीके से धान की खेती करते थे। सिंचाई की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें वर्ष में एक ही फसल पर निर्भर रहना पड़ता था। खेती के लिए ट्रैक्टर और अन्य कृषि मशीनरी किराये पर लेने से लागत भी बढ़ती थी। छह सदस्यीय परिवार की जिम्मेदारी के बीच सीमित कृषि आय के कारण आर्थिक चुनौतियां बनी रहती थीं।

इसी बीच गांव में भ्रमण के दौरान उद्यानिकी विभाग के कर्मचारियों ने उन्हें विभागीय योजनाओं और आधुनिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी। जानकारी से प्रेरित होकर गुरुचरण ने शासकीय उद्यान रोपणी, नगौई में आवेदन किया।

46 हजार रुपये की सहायता ने दिया खेती को नया आधार

राष्ट्रीय बागवानी मिशन और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत गुरुचरण को ड्रिप सिंचाई प्रणाली, प्लास्टिक मल्चिंग और ग्राफ्टेड बैंगन रोपण के लिए कुल 46 हजार रुपये का विभागीय अनुदान मिला। विभागीय मार्गदर्शन के साथ उन्होंने इन सुविधाओं को खेती में अपनाया और पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर सब्जी उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाया।

अब गुरुचरण वर्ष में दो से तीन फसलें ले रहे हैं। वर्तमान में वे भिंडी की खेती से भी आय अर्जित कर रहे हैं। विभाग को दी गई जानकारी के अनुसार, पहले उनकी अनुमानित वार्षिक आय करीब 45 हजार रुपये थी, जो अब बढ़कर लगभग ढाई से तीन लाख रुपये तक पहुंच गई है।

खुद आगे बढ़े, अब दूसरों को भी दे रहे प्रेरणा

खेती से बढ़ी आमदनी ने गुरुचरण के परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। आधुनिक तकनीक से मिले बेहतर परिणामों के बाद अब वे गांव के अन्य किसानों को भी उन्नत खेती के तरीकों और विभागीय योजनाओं की जानकारी दे रहे हैं।

गुरुचरण बताते हैं कि उद्यानिकी विभाग से योजनाओं की जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन मिलने के बाद उनका आधुनिक खेती के प्रति विश्वास बढ़ा। वे भविष्य में भी विभागीय मार्गदर्शन लेकर खेती को और बेहतर बनाने की दिशा में काम करना चाहते हैं।

यह कहानी बताती है कि सही तकनीक, सरकारी सहायता और किसान की मेहनत मिल जाए तो पारंपरिक खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ खेती में बदला जा सकता है।