112 कैप्टिव बिजली संयंत्रों को अधिकतम क्षमता पर चलाने का निर्देश

बिजली की बढ़ती मांग के बीच केंद्र का फैसला, 1 अक्टूबर से दिसंबर अंत तक लागू रहेगा आदेश

कोरबा। देश में बिजली की बढ़ती मांग के बीच केंद्र सरकार ने कम से कम 50 मेगावाट क्षमता वाले 112 कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अधिकतम क्षमता पर संचालित करने का निर्देश दिया है। बिजली मंत्रालय की ओर से 25 सितंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार यह व्यवस्था 1 अक्टूबर से दिसंबर के अंत तक लागू रहेगी।

यह निर्देश ऐसे समय जारी किया गया है, जब कई कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में कोयला भंडार पर दबाव बना हुआ है। सरकार का उद्देश्य आगामी महीनों में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना है।

इन 112 कैप्टिव बिजली संयंत्रों में एल्युमिनियम, इस्पात, सीमेंट और तेल शोधन जैसे ऊर्जा-गहन उद्योगों से जुड़े बड़े औद्योगिक समूहों के संयंत्र शामिल हैं। कैप्टिव पावर प्लांट मुख्य रूप से संबंधित उद्योगों की निरंतर बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए संचालित किए जाते हैं।

अतिरिक्त बिजली बाजार में बेचने का निर्देश

सरकार ने निर्देश दिया है कि यदि इन संयंत्रों में औद्योगिक जरूरत पूरी करने के बाद अतिरिक्त बिजली उपलब्ध रहती है, तो उसे बिजली बाजार के माध्यम से बेचने के लिए उपलब्ध कराया जाए। इससे राष्ट्रीय बिजली ग्रिड में अतिरिक्त बिजली की आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलेगी।

साप्ताहिक रिपोर्टिंग से होगी निगरानी

अधिकतम क्षमता पर उत्पादन सुनिश्चित करने के साथ ही सरकार ने इन संयंत्रों की निगरानी भी बढ़ा दी है। संबंधित बिजली उत्पादकों को अपने संचालन और उत्पादन की जानकारी केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) को प्रत्येक सप्ताह रिपोर्ट करनी होगी। इससे सरकार को बिजली उत्पादन और उपलब्धता की स्थिति पर नियमित नजर रखने में मदद मिलेगी।