सुरक्षित मातृत्व के लिए समय पर जांच और संस्थागत प्रसव जरूरी

कलेक्टर कुणाल दुदावत की अपील मां और बच्चे की सुरक्षा पूरे परिवार की जिम्मेदारी, खतरे के लक्षण दिखें तो तत्काल 108 पर करें संपर्क

कोरबा। जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने तथा मातृ मृत्यु की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों से समय पर स्वास्थ्य जांच, उचित उपचार और सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने की अपील की है। स्वास्थ्य विभाग ने गर्भावस्था की शुरुआत से लेकर प्रसव के बाद तक बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों की जानकारी साझा की है।

गर्भावस्था का समय पर कराएं पंजीयन
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गर्भावस्था की जानकारी मिलते ही मितानिन या एएनएम को इसकी जानकारी दें और 45 दिनों के भीतर गर्भावस्था का पंजीयन कराएं। गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों में कम से कम एक बार चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है।

गर्भवती महिला की कम से कम चार नियमित प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) कराना जरूरी है। शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में प्रत्येक माह की 9 और 24 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत जांच की सुविधा उपलब्ध है। इस दौरान बीपी, हीमोग्लोबिन, पेशाब, सिकल सेल सहित आवश्यक जांच नि:शुल्क की जाती है।

एनीमिया को न करें नजरअंदाज
यदि जांच में हीमोग्लोबिन कम पाया जाता है अथवा सिकल सेल की पुष्टि होती है तो इसे गंभीरता से लेने की सलाह दी गई है। चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां नियमित लेने के साथ हरी सब्जियां, गुड़-चना और पौष्टिक आहार का सेवन करें। आवश्यकता पड़ने पर रक्त की व्यवस्था के लिए संभावित रक्तदाताओं के नाम और मोबाइल नंबर पहले से सुरक्षित रखने की भी सलाह दी गई है।

जोखिम वाली गर्भावस्था में अस्पताल में ही हो प्रसव
कम उम्र, जुड़वा गर्भ, उच्च रक्तचाप, पूर्व में ऑपरेशन या सिजेरियन प्रसव तथा अन्य चिकित्सकीय जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला चिकित्सालय या मेडिकल कॉलेज जैसे उच्च स्वास्थ्य संस्थान में ही प्रसव कराने की सलाह दी गई है। ऐसे मामलों में घर पर प्रसव कराने से बचने की अपील की गई है।

प्रसव से पहले परिवहन की रखें तैयारी
परिवारों से 108 एंबुलेंस का नंबर मोबाइल में सेव रखने तथा प्रसव की संभावित तिथि से पहले परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित करने कहा गया है। विशेष रूप से दूरस्थ और बारिश से प्रभावित क्षेत्रों, जैसे पोड़ी-उपरोड़ा एवं करतला क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को संभावित प्रसव तिथि से करीब सात दिन पहले अस्पताल के नजदीक पहुंचने की सलाह दी गई है।

खतरे के लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल पहुंचें
स्वास्थ्य विभाग ने गर्भावस्था के दौरान तेज बुखार या दौरे, अत्यधिक रक्तस्राव, बढ़ा हुआ रक्तचाप, तेज सिरदर्द, आंखों के सामने धुंध या अंधेरा छाना, पानी की थैली फटना तथा बच्चे की हलचल कम या बंद होना जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेने की अपील की है। ऐसे किसी भी खतरे के संकेत पर देरी न करते हुए तत्काल स्वास्थ्य संस्था से संपर्क करें और जरूरत पड़ने पर 108 एंबुलेंस की सहायता लें।

प्रसव के बाद 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण
प्रसव के बाद के शुरुआती 48 घंटे मां और नवजात दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए प्रसव के बाद मां को कम से कम 48 घंटे स्वास्थ्य संस्था में निगरानी में रखने की सलाह दी गई है। घर लौटने के बाद भी बुखार, अत्यधिक रक्तस्राव, बदबूदार स्राव अथवा कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र ले जाने कहा गया है।

मां-बच्चे की सुरक्षा पूरे परिवार की जिम्मेदारी
कलेक्टर कुणाल दुदावत एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन. केशरी ने जिलेवासियों से अपील की है कि गर्भवती महिला की देखभाल को परिवार अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी समझे।

गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों में पंजीयन, नियमित जांच, पौष्टिक आहार, चिकित्सकीय सलाह का पालन और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि गर्भवती महिला और नवजात की सुरक्षा केवल स्वास्थ्यकर्मियों की नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी है।