बेकाबू रफ्तार ने ली तीन गौवंशों की जान, दो घायल घंटों तड़पते रहे

जेबीडी कॉलेज के पास देर रात दर्दनाक हादसा, मदद के लिए भटकते रहे ग्रामीण-गौसेवक

एनएचएआई और पंचायत की व्यवस्था पर उठे सवाल, पशु एम्बुलेंस व उपचार केंद्र की मांग

कटघोरा। कटघोरा क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर एक बार फिर तेज रफ्तार भारी वाहन की चपेट में आने से गौवंशों की मौत का दर्दनाक मामला सामने आया है। जेबीडी कॉलेज के पास रविवार देर रात करीब 11 बजे हुए हादसे में तीन गौवंशों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद घायल गौवंश काफी देर तक सड़क किनारे तड़पते रहे। समय पर उपचार और राहत की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों और गौसेवकों में आक्रोश व्याप्त है।

हादसे के बाद मदद के लिए दौड़े ग्रामीण
हादसे की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण और गौसेवक मौके पर पहुंचे। उन्होंने घायल गौवंशों को सड़क से हटाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और उपचार दिलाने का प्रयास किया। ग्रामीणों का कहना है कि घायल पशुओं की हालत गंभीर थी, ऐसे में उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता की जरूरत थी।

गौसेवकों के अनुसार, उन्होंने स्थानीय स्तर पर मदद के लिए संपर्क करने का प्रयास किया। उनका आरोप है कि ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। वहीं, एनएचएआई से संपर्क करने पर कथित रूप से वाहन उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। इसके चलते घायल पशुओं को तत्काल अस्पताल पहुंचाने में परेशानी हुई।

एक के बाद एक हादसे, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था
ग्रामीणों का कहना है कि नेशनल हाईवे पर रात के समय भारी वाहनों की रफ्तार काफी अधिक रहती है। दूसरी ओर सड़क पर घूमने वाले मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।

कुछ दिन पूर्व दर्री मुख्य मार्ग पर भी भारी वाहन की चपेट में आने से 11 गौवंशों के प्रभावित होने की घटना सामने आई थी। इस घटना के विरोध में गौसेवकों ने चक्काजाम कर नाराजगी जताई थी। इसके बावजूद हाईवे पर मवेशियों की सुरक्षा और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

घायल पशुओं के लिए तत्काल सहायता की जरूरत
इस घटना ने जिले में सड़क हादसों में घायल पशुओं के लिए उपलब्ध आपातकालीन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इंसानों की तरह हादसे में घायल पशुओं को भी तत्काल उपचार की जरूरत होती है।

यदि दुर्घटना के बाद घंटों तक घायल पशु सड़क किनारे पड़े रहें, तो उनकी जान बचाना मुश्किल हो सकता है।

गौसेवकों ने प्रशासन से मांग की है कि जिले के प्रमुख हाईवे और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों के लिए पशु एम्बुलेंस की स्थायी व्यवस्था की जाए। साथ ही घायल पशुओं के तत्काल उपचार के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहने वाली पशु चिकित्सा सुविधा विकसित की जाए।

हाईवे पर मवेशियों को रोकने बने ठोस व्यवस्था
गौसेवकों ने कहा कि केवल हादसे के बाद राहत पहुंचाना पर्याप्त नहीं है। सड़क पर मवेशियों के पहुंचने की स्थिति को रोकने के लिए भी ठोस व्यवस्था जरूरी है। संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां निगरानी, प्रकाश व्यवस्था तथा मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

उन्होंने तेज रफ्तार भारी वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण और यातायात नियमों के पालन की निगरानी की भी मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में और बड़े हादसे हो सकते हैं।

जवाबदेही तय करने की मांग
घटना के बाद गौसेवकों और ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क हादसे के बाद राहत और बचाव के लिए संबंधित एजेंसियों के बीच स्पष्ट जिम्मेदारी और तत्काल प्रतिक्रिया की व्यवस्था होनी चाहिए।

गौसेवकों ने चेतावनी दी है कि यदि घायल पशुओं के उपचार, पशु एम्बुलेंस और हाईवे पर मवेशियों की सुरक्षा को लेकर शीघ्र ठोस व्यवस्था नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।