मदरसा दारुल उलूम रिजविया में शान से लहराया तिरंगा, विद्यार्थियों ने दिया एकता और भाईचारे का संदेश

कोरबा। टीपी नगर स्थित मदरसा दारुल उलूम रिजविया में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण एवं देशभक्ति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुन्नी मुस्लिम जमात कोरबा के सदर हाजी अखलाक खान अशरफी ने ध्वजारोहण किया। इसके बाद मदरसे के विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत एवं राष्ट्रीय गीत प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना का संचार किया।

कार्यक्रम के दौरान शहर में तिरंगा यात्रा भी निकाली गई।

तिरंगा यात्रा में शामिल लोगों ने देशभक्ति के नारों के साथ राष्ट्रीय एकता और भाईचारे का संदेश दिया। विद्यार्थियों ने अंग्रेजी भाषा में संबोधन देकर अपनी प्रतिभा का भी प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम में शिक्षा के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने बताया कि मदरसा दारुल उलूम रिजविया में बच्चों को दीनी तालीम के साथ दुनियावी शिक्षा भी दी जा रही है, ताकि विद्यार्थी भविष्य में शिक्षा एवं रोजगार के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ सकें। इस दौरान अभिभावकों और समाज के लोगों को बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूक किया गया।

उत्कृष्ट विद्यार्थियों का सम्मान

परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मदरसे के विद्यार्थियों अदनान रजा, दिलखुश, आदिल रजा, शहीद रजा, हामिद रजा एवं मोहम्मद ताजुद्दीन को मेडल एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि हाजी अखलाक खान अशरफी ने स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई में देश के सभी धर्म, समाज और वर्ग के लोगों ने योगदान दिया है। देश की एकता, भाईचारा और आपसी सौहार्द ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि गंगा-जमुनी तहजीब देश की खूबसूरत विरासत है और इसे कायम रखना सभी की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में कोरबा प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र जायसवाल ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के माध्यम से देशभक्ति और भाईचारे का संदेश समाज में सकारात्मक वातावरण बनाता है। उन्होंने कोरबा की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी सौहार्द की परंपरा का उल्लेख करते हुए इसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम में सुन्नी मुस्लिम जमात कोरबा के सरफरस्त कारी सैय्यद शब्बीर अहमद अशरफी, मदरसा दारुल उलूम रिजविया के सदर हाजी अब्दुल रज्जाक मेमन, सेक्रेटरी हलीम शेख, जामा मस्जिद के इमाम मौलाना जाकि आलम, हाफिज निजामुद्दीन, मौलाना सलामुद्दीन, मौलाना अजीजुल हक सहित शिक्षक, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।