PM आवास योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा! 44 हितग्राहियों की राशि दूसरे खातों में भेजने के आरोप, जांच की उठी मांग

कोरबा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में कोरबा विकासखंड की कई ग्राम पंचायतों से गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि योजना के तहत 44 वास्तविक हितग्राहियों के नाम पर स्वीकृत राशि कथित रूप से दूसरे लोगों के बैंक खातों में भेज दी गई। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का मामला हो सकता है।

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2023-24 में शासन के निर्देशानुसार ग्राम सभाओं के माध्यम से स्थायी प्रतीक्षा सूची का सत्यापन कर पात्र एवं अपात्र हितग्राहियों की सूची तैयार की गई थी। उस दौरान अपात्र पाए गए लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए थे।

आरोप है कि 14 अप्रैल 2026 को आयोजित ग्राम सभा में बिना किसी नए शासनादेश के उन्हीं लोगों को दोबारा पात्र दर्शाने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।

ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया संबंधित हितग्राहियों की जानकारी और सहमति के बिना पूरी की गई।

आरोप है कि जिन लोगों के नाम पर प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए, उनके स्थान पर दूसरे व्यक्तियों के आधार नंबर और बैंक खाते दर्ज कर दिए गए, जिसके कारण सरकारी राशि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने के बजाय अन्य खातों में स्थानांतरित हो गई।

बताया जा रहा है कि चिर्रा, देवरमाल, खोड्डल, कुदमुरा, नकिया, नकटीखार और तिलकेजा ग्राम पंचायतों में कुल 44 हितग्राहियों की राशि कथित रूप से दूसरे बैंक खातों में भेजी गई है। ग्रामीणों ने पंचायत और जनपद स्तर पर आवास योजना की प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए विकासखंड स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि तिलकेजा ग्राम पंचायत में इससे पहले भी प्रधानमंत्री आवास योजना में अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं। इसके बावजूद यदि अब कई पंचायतों से एक जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं, तो पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच आवश्यक हो गई है।

हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन की ओर से जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि प्रधानमंत्री आवास योजना की पारदर्शिता बनी रहे और पात्र हितग्राहियों को उनका अधिकार मिल सके।