स्कूल बस हादसे पर फूटा गुस्सा: सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन, बेटा बोला “मेरे पिता लौटकर नहीं आएंगे, किसी और के साथ ऐसा न हो”

नशे में बस चला रहा था चालक, इलाज के दौरान बुजुर्ग की मौत; परिजनों ने सख्त कार्रवाई और सड़क सुरक्षा उपायों की उठाई मांग

कोरबा। मानिकपुर क्षेत्र के पंडित रविशंकर शुक्ल नगर में स्कूल बस की टक्कर से घायल 61 वर्षीय भोकालू साहू की इलाज के दौरान मौत के बाद शनिवार को परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने शव को सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया और मांग की कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

प्रदर्शन की सूचना मिलते ही सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी, कोतवाली थाना प्रभारी प्रमोद डडसेना, मानिकपुर चौकी प्रभारी परमेश्वर राठौर सहित प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। काफी देर तक चली बातचीत के बाद स्कूल प्रबंधन ने मृतक के परिजनों को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की, जबकि प्रशासन की ओर से 25 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई।

अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिलाया, जिसके बाद परिजनों ने प्रदर्शन समाप्त कर अंतिम संस्कार के लिए शव को गृहग्राम ले गए।

पुलिस के अनुसार हादसा उस समय हुआ जब सेंट जेवियर्स स्कूल की बस बच्चों को छोड़कर वापस लौट रही थी। आरोप है कि चालक गोरेलाल निषाद नशे की हालत में लापरवाही से वाहन चला रहा था। टक्कर में गंभीर रूप से घायल भोकालू साहू ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। पुलिस ने चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

“मेरे पिता तो नहीं लौटेंगे, लेकिन किसी और के साथ ऐसा न हो”
मृतक के पुत्र ने भावुक होते हुए कहा कि उनके पिता अब वापस नहीं आएंगे, लेकिन प्रशासन को ऐसे ठोस कदम उठाने चाहिए जिससे भविष्य में किसी परिवार को ऐसा दर्द न झेलना पड़े। उन्होंने स्कूल प्रबंधन की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए स्कूल बस चालकों की नियमित मेडिकल जांच, शराब सेवन की जांच और सुरक्षित वाहन संचालन सुनिश्चित करने की मांग की।

कॉलोनीवासियों ने उठाई सड़क सुरक्षा की मांग
स्थानीय लोगों ने भी हादसे के बाद कॉलोनी के भीतर भारी वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने, दुर्घटनास्थल पर स्पीड ब्रेकर बनाने और सड़क सुरक्षा के स्थायी इंतजाम करने की मांग की। अधिकारियों ने इन मांगों पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

मुआवजा नहीं, जवाबदेही जरूरी
घटना के बाद लोगों के बीच यह सवाल भी उठता रहा कि क्या किसी की जान की भरपाई आर्थिक सहायता से की जा सकती है। लोगों का कहना है कि राहत राशि मानवीय संवेदना का हिस्सा हो सकती है, लेकिन ऐसे हादसों के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना प्रशासन और संबंधित संस्थानों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।