कम बारिश को देखते हुए उन्नत किस्मों के चयन, जल संरक्षण और वैकल्पिक फसलों पर दिया जोर
कोरबा। मानसून की अनिश्चित चाल और जून माह में सामान्य से कम वर्षा को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को कम एवं मध्यम अवधि में तैयार होने वाली उन्नत धान किस्मों की खेती अपनाने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि बदलते मौसम और वर्षा के असमान वितरण की स्थिति में लंबी अवधि वाली पारंपरिक धान पर निर्भर रहने के बजाय कम जोखिम वाली खेती किसानों के लिए अधिक लाभदायक साबित हो सकती है।
राज्य शासन ने भी आकस्मिक कृषि कार्य योजना के तहत कम अवधि वाली फसलों और जल संरक्षण उपायों को प्राथमिकता दी है। जून माह में पर्याप्त बारिश नहीं होने से जिले के कई क्षेत्रों में धान की रोपाई प्रभावित हुई है। ऐसे में किसान अब जुलाई में अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 110 से 125 दिनों में तैयार होने वाली उन्नत धान किस्में कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हैं। इन किस्मों के चयन से किसानों को मौसम की अनिश्चितता से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपने क्षेत्र और भूमि की प्रकृति के अनुसार कृषि विस्तार अधिकारियों से सलाह लेकर बीज का चयन करने की अपील की है। साथ ही वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण करने और मौसम आधारित कृषि सलाह का पालन करने पर भी जोर दिया गया है।
विभाग ने किसानों को केवल धान पर निर्भर न रहने की सलाह देते हुए ऊंची भूमि वाले क्षेत्रों में अरहर, उड़द, मूंग, तिल, सोयाबीन तथा अन्य दलहनी एवं तिलहनी फसलों की खेती बढ़ाने की अनुशंसा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि जहां सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, वहां रोपा पद्धति के बजाय सीधे बुवाई की तकनीक अपनाने से पानी और श्रम दोनों की बचत होगी।
जुलाई की बारिश से बढ़ी उम्मीद
मौसम विभाग ने जुलाई माह में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसून के सक्रिय होने और अच्छी वर्षा की संभावना जताई है। इससे कोरबा जिले के किसानों को उम्मीद है कि कृषि कार्यों में तेजी आएगी और धान की रोपाई का रकबा बढ़ेगा।
Editor – Niraj Jaiswal
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