कोरबा। मानसून के आगमन से पहले जिले के प्रसिद्ध कनकेश्वरधाम कनकी में प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। एशियन ओपन बिल स्टार्क (साइबेरियन सारस) के झुंड सात समंदर पार से लंबी यात्रा तय कर यहां पहुंच रहे हैं और मंदिर परिसर में स्थित इमली, बरगद तथा पीपल के विशाल वृक्षों को अपना आश्रय बना रहे हैं। पक्षियों की आमद से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।
ग्रामीणों के अनुसार कनकी में हर वर्ष मई और जून माह के दौरान श्रीलंका, केरल सहित अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। ये पक्षी मानसून के दौरान यहीं घोंसले बनाकर अंडे देते हैं तथा अपने बच्चों का पालन-पोषण करते हैं। प्रजनन काल पूरा होने के बाद नवंबर माह से उनकी वापसी का सिलसिला शुरू हो जाता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इन पक्षियों का आगमन अच्छी बारिश और मानसून की दस्तक का संकेत होता है।
यही वजह है कि क्षेत्रवासी इन्हें शुभ संदेशवाहक और देवदूत के रूप में सम्मान देते हैं। वर्षों से चली आ रही इस प्राकृतिक परंपरा ने कनकी को प्रवासी पक्षियों के प्रमुख आश्रय स्थल के रूप में पहचान दिलाई है।
सुरक्षा के लिए वन विभाग सतर्क
प्रवासी पक्षियों के आगमन को देखते हुए वन विभाग भी उनकी सुरक्षा को लेकर सक्रिय हो गया है। पक्षियों के घोंसलों और बच्चों की सुरक्षा के लिए पेड़ों के नीचे विशेष सुरक्षा जाल (नेट) लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। विभाग का उद्देश्य पक्षियों को किसी भी प्रकार की दुर्घटना या खतरे से बचाना है।
कनकी में हर साल प्रवासी पक्षियों का आगमन न केवल जैव विविधता का अनूठा उदाहरण है, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने का भी माध्यम बन रहा है।
Editor – Niraj Jaiswal
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