ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू, जून तक 25% ग्राम पंचायतों को कचरा मुक्त बनाने का लक्ष्य

जिला पंचायत में आयोजित कार्यशाला में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और स्वच्छता पर दिया गया जोर

कोरबा।भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 अब वर्ष 2016 के पुराने नियमों का स्थान ले चुके हैं। इन नियमों का उद्देश्य कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण को रोकना और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

यह जानकारी जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिनेश कुमार नाग ने बुधवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 संबंधी कार्यशाला में दी। उन्होंने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार यह नियम 01 अप्रैल 2026 से पूरे देश में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लागू हो चुका है।

सीईओ श्री नाग ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर इन नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके तहत ग्राम पंचायतों में कचरा संग्रहण शुल्क, शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी। नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान रहेगा।

उन्होंने बताया कि ग्राम एवं जनपद स्तर पर उत्पन्न कचरे की रिपोर्ट प्रत्येक 15 दिवस में तैयार कर प्रस्तुत करनी होगी। राज्य शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार जून माह तक जिले की 25 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को वैज्ञानिक तरीके से कचरा मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

कार्यशाला में उन्होंने स्वच्छता अभियान की शुरुआत स्वयं से करने पर जोर देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं कर्मचारी अपने घरों में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन अपनाएं और कचरे के पृथक्करण के लिए नीले, हरे, लाल एवं पीले रंग के डस्टबिन का उपयोग करें।

कार्यक्रम में स्वच्छ भारत मिशन के दीप सरकार ने पॉवर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के उद्देश्य, प्रमुख विशेषताओं एवं मुख्य प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी।

इस अवसर पर लेखा अधिकारी राजेंद्र यादव, सहायक परियोजना अधिकारी इंदिरा भगत,अमिता साहू,जनपद पंचायतों के सीईओ,स्वच्छ भारत मिशन,राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, मनरेगा के अधिकारी-कर्मचारी, सहायक विकास विस्तार अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी एवं तकनीकी सहायक उपस्थित रहे।