सिकल सेल,बाल मधुमेह और जन्मजात हृदय रोग की जागरूकता में अब स्व-सहायता समूह की महिलाएं निभाएंगी फ्रंटलाइन वारियर्स की भूमिका

कोरबा। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सिकल सेल, बाल मधुमेह, जन्मजात हृदय रोग तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्व-सहायता समूह की महिलाएं अब फ्रंटलाइन वारियर्स की भूमिका में नजर आएंगी।

जिला स्वास्थ्य विभाग ने यूनिसेफ छत्तीसगढ़ एवं एमसीसीआर ट्रस्ट के सहयोग से सीईओ जिला पंचायत सभागार में स्व-सहायता समूह सदस्यों के लिए विशेष उन्मुखीकरण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।

इस कार्यक्रम में नई रणनीति तैयार की गई है, जिसमें गांव-गांव में सक्रिय महिला नेटवर्क को कम्युनिटी हेल्थ एंबेसडर के रूप में तैयार किया जाएगा। इन महिलाओं को सिकल सेल, बाल मधुमेह और जन्मजात हृदय रोग के साइलेंट लक्षणों की पहचान, नियमित जांच तथा समय पर इलाज दिलाने की ट्रेनिंग दी गई है।

ये महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताएं गांव के हर घर तक पहुंचकर परिवारों को जागरूक करेंगी। साथ ही एनीमिया नियंत्रण, संस्थागत प्रसव और पूर्ण टीकाकरण जैसी योजनाओं को जमीनी स्तर पर शत-प्रतिशत सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

कार्यशाला को सफल बनाने में यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह और एमसीसीआर ट्रस्ट के डॉ. डी. श्याम कुमार की टीम की मुख्य भूमिका रही।

जिला स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि स्व-सहायता समूह की महिलाओं को सशक्त बनाकर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाया जा सकता है।