बालको की ‘मोर जल मोर माटी’ पहल से मूंगफली बनी किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम

बालकोनगर। कोरबा के आसपास के ग्रामीण इलाकों में खेती का तरीका धीरे-धीरे बदल रहा है। पहले किसान ज्यादा पानी वाली धान की खेती पर निर्भर थे, लेकिन अब वे मूंगफली की खेती की ओर बढ़ रहे हैं।

भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) अपनी ‘मोर जल मोर माटी’ योजना के जरिए 40 गांवों के 9,000 से अधिक किसानों को सहयोग दे रही है। परियोजना के तहत जल प्रबंधन, आधुनिक खेती, पशुपालन और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को बढ़ावा दिया जा रहा है।

पहले क्षेत्र में बहुत कम किसान मूंगफली की खेती करते थे, वह भी केवल घरेलू उपयोग के लिए। पारंपरिक तरीकों के कारण लागत अधिक और उत्पादन कम होने से पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता था। बालको ने बेहतर बीज, खाद और तकनीकी मदद देकर इन समस्याओं को दूर किया।

अब किसानों को लाइन से बुवाई, बीज उपचार और सही मात्रा में खाद देने जैसी ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे उत्पादन बढ़ा है।

कंपनी के सामुदायिक विकास प्रयासों का असर साफ दिखाई दे रहा है। पहले जहां 50 से भी कम किसान मूंगफली उगाते थे, अब करीब 1,000 किसान इसकी खेती कर रहे हैं। प्रति एकड़ 8 से 10 क्विंटल तक उत्पादन हो रहा है और किसानों को 45 से 55 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय मिल रही है। वर्ष 2026 में 470 से ज्यादा परिवारों को सीधा लाभ मिला, जबकि लगभग 200 और परिवारों ने इसे अपनाया है।

भटगांव की निवासी सुनीता राठिया ने बताया, “पहले मैं केवल धान की खेती करती थी, जिसमें ज्यादा पानी और लागत लगती थी, लेकिन लाभ सीमित था। ‘मोर जल मोर माटी’ परियोजना से जुड़ने के बाद मुझे मूंगफली की उन्नत खेती के बारे में जानकारी मिली। बेहतर बीज और उर्वरक मिलने से अच्छा उत्पादन हुआ। अब कम पानी में ज्यादा आय हो रही है।”

बुंदेली गांव के किसान कन्हैया लाल ने कहा कि परियोजना से जुड़ने के बाद आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण मिला, जिससे उनकी मूंगफली की पैदावार बढ़कर 8 क्विंटल प्रति एकड़ हो गई। इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

बालको की यह पहल सिर्फ आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है।

फसल बदलने से जमीन की सेहत सुधर रही है, पानी की बचत हो रही है और अगली फसलों का उत्पादन भी बेहतर हो रहा है। कंपनी किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने का निरंतर प्रयास कर रही है।