खदानों में खपाया जीवन, सीमित पेंशन से कैसे गुजरे बाकी जिंदगी: कोल पेंशनर्स ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

कोरबा। कोल इंडिया और एसईसीएल के सेवानिवृत्त कर्मियों (कोल पेंशनर्स) में गहरी नाराजगी और चिंता है। वे अपनी पेंशन में महंगाई के हिसाब से बढ़ोतरी न होने, अंशदान पर उचित रिटर्न न मिलने और सीएमपीएस-1998 योजना की कमियों को लेकर परेशान हैं। संगठन ने इन मुद्दों को प्रधानमंत्री तक पहुंचा दिया है।

ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ कोल पेंशनर्स के संयोजक पी.के. सिंह राठौर ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कोयला पेंशन योजना में तत्काल संशोधन की मांग की है। इसमें पूर्व चेयरमैन, सीएमडी और डायरेक्टर स्तर के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।

संगठन ने बताया कि वर्तमान में लगभग 5 लाख सेवानिवृत्त कोयला कर्मी बिना किसी महंगाई राहत के सीमित पेंशन पर जीवनयापन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोयला कर्मियों ने राष्ट्रीय खजाने के लिए 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि उत्पन्न करने में अपना खून-पसीना बहाया है, लेकिन आज उनकी पेंशन इतनी कम है कि मुश्किल से गुजारा हो पा रहा है।

एसोसिएशन ने लोक लेखा समिति की 12वीं रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पेंशनरों की चिंताओं पर उस समय ध्यान दिया गया था, लेकिन आज भी कई मुद्दे अनसुलझे पड़े हैं।

मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

पेंशन में महंगाई भत्ते (DA) के अनुसार नियमित समायोजन

सीएमपीएस-1998 के अंतर्गत अंशदान पर उचित रिटर्न तय करना

पेंशन योजना में तत्काल संशोधन कर सेवानिवृत्त कर्मियों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना

कोरबा सहित पूरे कोयला क्षेत्र के पेंशनर्स ने सरकार से अपील की है कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर तुरंत ध्यान दे और उनके हक में उचित निर्णय ले।