रेलवे स्टेशन की सेकंड एंट्री यात्रियों के लिए बनी मुसीबत:कोल डस्ट और धूल की मोटी परत,नियमित पानी छिड़काव की मांग

कोरबा। कोरबा रेलवे स्टेशन की सेकंड एंट्री (दूसरा प्रवेश द्वार) यात्रियों, रोजाना आने-जाने वाले रेलवे कर्मचारियों और स्टेशन पर आने-जाने वालों के लिए लगातार परेशानी का सबब बनी हुई है। यहां पहुंच मार्ग से लेकर फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) तक कोयला (कोल) की धूल और डस्ट की मोटी परत जमा हो गई है, जो कहीं-कहीं 2-3 मिलीमीटर से भी अधिक मोटी हो चुकी है।

सेकंड एंट्री के दोनों तरफ कोल साइडिंग होने के कारण कोयला लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान उड़ने वाली धूल सड़क और मार्ग पर जम रही है। एसईसीएल प्रबंधन को यात्रियों की सुविधा के लिए कोल साइडिंग क्षेत्र और बाइपास सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव करना है, लेकिन यह रोजाना नहीं होता। परिणामस्वरूप धूल और डस्ट लगातार बढ़ रही है, जिससे यात्रियों को सांस लेने में तकलीफ, कपड़ों पर कालिख और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो रही हैं।

रोजाना सफर करने वाले यात्री और रेलवे कर्मचारी इस समस्या से जूझ रहे हैं। कर्मचारियों के ड्यूटी आने-जाने का मुख्य रास्ता यही है, जबकि स्टेशन आने-जाने वाले लोगों को भी भारी असुविधा होती है। हालत यह है कि वाहन पार्किंग में रखने वाले लोग अब गाड़ियों पर कवर लगाकर जाने लगे हैं, ताकि धूल से वाहन खराब न हों।

साफ-सफाई का काम केवल तभी होता है, जब कोई वरिष्ठ रेलवे अधिकारी दौरे पर आता है। स्थानीय लोगों और यात्रियों की मांग है कि एसईसीएल और रेलवे प्रशासन मिलकर नियमित रूप से पानी छिड़काव सुनिश्चित करें, कोल साइडिंग के आसपास डस्ट सप्रेशन सिस्टम लगाएं और मार्ग की सफाई को दैनिक आधार पर किया जाए, ताकि यह प्रवेश द्वार यात्रियों के लिए सुगम और सुरक्षित बने।

यह समस्या कोरबा जैसे औद्योगिक क्षेत्र में कोयला आधारित गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव को भी उजागर करती है, जहां जनता की सुविधा और स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है।