कोरोना से टूटी आजीविका को पीएम स्वनिधि ने दिया सहारा, 9 हजार से अधिक पथ विक्रेता बने आत्मनिर्भर                            

कोरबा, 27 जनवरी 2026।कोरोना महामारी के दौरान जब पथ विक्रेताओं की रोजी-रोटी पूरी तरह ठप हो गई थी और घरों के चूल्हे बुझने की कगार पर थे, तब प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना उनके लिए संजीवनी बनकर सामने आई।

इस योजना ने न सिर्फ छोटे कारोबारों को दोबारा खड़ा किया, बल्कि हजारों परिवारों को आत्मनिर्भरता की नई राह भी दिखाई।महामारी के दौरान रेहड़ी, ठेला, फुटपाथ और पटरी पर कारोबार करने वाले पथ विक्रेताओं की आमदनी शून्य हो गई थी। दिन-प्रतिदिन कमाकर जीवन यापन करने वाले इन परिवारों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया था।

ऐसे कठिन समय में भारत सरकार द्वारा 1 जून 2020 को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य बिना किसी गारंटी के छोटे ऋण उपलब्ध कराकर पथ विक्रेताओं को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करना था।कोरबा नगर निगम क्षेत्र में इस योजना का असर बेहद सकारात्मक रहा है।

जिला शहरी विकास अभिकरण के मिशन मैनेजर मनीष भोई के अनुसार अब तक 9,079 हितग्राहियों को ऋण स्वीकृत किया जा चुका है, जिनमें से 8,655 पथ विक्रेताओं को ऋण राशि का वितरण किया जा चुका है। इस सहायता से पथ विक्रेताओं ने अपने व्यवसाय फिर से शुरू किए और आज वे आत्मविश्वास के साथ अपने परिवारों की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

योजना से लाभान्वित होने वालों में पोड़ीबहार वार्ड क्रमांक 32 के जयकुमार देवांगन शामिल हैं, जो मसाले बेचने का कार्य करते हैं। लॉकडाउन में उनका व्यवसाय बंद हो गया था, लेकिन स्वनिधि योजना से मिले 10 हजार रुपये के ऋण ने उन्हें फिर से शुरुआत करने का अवसर दिया। समय पर ऋण चुकाने के बाद उन्होंने 20 हजार रुपये का दूसरा ऋण भी प्राप्त किया और अब 50 हजार रुपये के लिए आवेदन कर चुके हैं।इसी तरह बालको क्षेत्र के भदरापारा वार्ड क्रमांक 40 की सुषमा यादव, जो सिलाई का कार्य करती हैं, लॉकडाउन के दौरान पूरी तरह बेरोजगार हो गई थीं। स्वनिधि योजना से मिले ऋण ने उन्हें फिर से आत्मनिर्भर बनाया और आज वे नियमित रूप से अपना व्यवसाय संचालित कर रही हैं।कांशीनगर वार्ड क्रमांक 22 के रामरूप पाण्डेय, जो फल विक्रेता हैं, तथा दर्री वार्ड क्रमांक 58 की सावित्री टंडन, जो फोटो फ्रेमिंग का कार्य करती हैं, को भी इस योजना से नया जीवन मिला। महामारी में बंद पड़े उनके व्यवसाय आज फिर से चल पड़े हैं।

प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना कोरबा के पथ विक्रेताओं के लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं,बल्कि सम्मान,आत्मविश्वास और स्थायित्व का प्रतीक बन चुकी है। संकट के समय बुझ चुके चूल्हों में फिर से आग जली है और हजारों परिवारों की जिंदगी एक बार फिर पटरी पर लौट आई है।