रेडियोलॉजिस्ट की कमी से हाहाकार:कोरबा जिले में मरीजों को लंबा इंतजार, गर्भवती महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान

कोरबा।ऊर्जाधानी कोरबा की 14 लाख की आबादी के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास केवल एक रेडियोलॉजिस्ट, डॉ. राकेश अग्रवाल, उपलब्ध हैं, जिसके कारण मरीजों को सोनोग्राफी जैसी महत्वपूर्ण जांच के लिए एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल और रानी धनराज कुंवर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उनकी सेवाएं ली जा रही हैं, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण वनांचल क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सोनोग्राफी की सुविधा लगभग बंद हो चुकी है। मरीजों को या तो लंबा इंतजार करना पड़ रहा है या निजी अस्पतालों का महंगा रास्ता चुनना पड़ रहा है।

रेडियोलॉजिस्ट की कमी से बढ़ी परेशानी

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रोजाना 40 से 45 सोनोग्राफी हो पाती हैं, लेकिन मरीजों की संख्या के हिसाब से यह नाकाफी है। सीएमएचओ डॉ. एसएन केसरी ने बताया कि अस्पताल में कम से कम 4 रेडियोलॉजिस्ट की जरूरत है। एक अन्य रेडियोलॉजिस्ट, जो पहले मेडिकल कॉलेज में थे, लंबी छुट्टी पर चले गए हैं और अभी तक वापस नहीं लौटे। इसके चलते शहर के दो प्रमुख केंद्रों तक ही सोनोग्राफी की सुविधा सीमित हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को शहर आना पड़ता है, जहां भी उन्हें लंबी प्रतीक्षा का सामना करना पड़ रहा है।

मरीजों की मुश्किलें: लंबी प्रतीक्षा और निजी अस्पतालों की मजबूरी

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रोजाना लगभग 1200 मरीज ओपीडी में आते हैं, जिनमें से कई को सोनोग्राफी की जरूरत होती है। लेकिन एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट होने के कारण दोपहर 2 बजे के बाद सोनोग्राफी कर पाना मुश्किल हो जाता है। मरीजों को अगली तारीख दी जाती है, जो एक महीने बाद की हो सकती है। नतीजतन, कई मरीज निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हैं, जहां प्रत्येक सोनोग्राफी के लिए 800 से 1000 रुपये का शुल्क देना पड़ता है।

सोनोग्राफी क्यों है जरूरी?

सोनोग्राफी गर्भवती महिलाओं के लिए शिशु की स्थिति जानने, पथरी, पैनक्रियाज, हर्निया, हाइड्रोसील, और थायराइड जैसी बीमारियों की जांच के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह जांच डॉक्टरों को सटीक इलाज के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करती है। लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण मरीजों को समय पर जांच नहीं मिल पा रही, जिससे उनका इलाज प्रभावित हो रहा है।

रेडियोलॉजिस्ट की कमी का कारण

रेडियोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई महंगी और सीटें सीमित होने के कारण रेडियोलॉजिस्ट की संख्या कम है। जो रेडियोलॉजिस्ट तैयार होते हैं, वे छोटे शहरों में सेवा देने से कतराते हैं। जिला प्रशासन ने डीएमएफ फंड से आकर्षक वेतन की पेशकश के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट की भर्ती नहीं कर पाया है। निजी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट की भारी मांग है, जहां वे सालाना 50 लाख तक कमा सकते हैं। कोरबा में भी निजी संस्थानों में मरीजों की भीड़ रहती है, और वहां भी सोनोग्राफी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।

स्वास्थ्य विभाग का पक्ष

सीएमएचओ डॉ. एसएन केसरी ने स्वीकार किया कि एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट होने के कारण उनकी सेवाएं केवल मेडिकल कॉलेज और रानी धनराज कुंवर स्वास्थ्य केंद्र तक सीमित हैं। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में भी सोनोग्राफी की सुविधा थी, लेकिन अब मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण यह संभव नहीं है।

कोरबा में स्वास्थ्य सेवाओं की यह स्थिति चिंताजनक है। रेडियोलॉजिस्ट की कमी और सोनोग्राफी की लंबी प्रतीक्षा मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। स्वास्थ्य विभाग को इस समस्या के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है, ताकि मरीजों को समय पर और किफायती जांच सुविधा मिल सके।