एनटीपीसी सीपत में मजदूरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल: मजदूरी दर बढ़ाने की मांग

देव शिल्पी मजदूर कल्याण समिति के नेतृत्व में एनटीपीसी सीपत के लगभग 350 से 400 मजदूर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। मजदूरों की प्रमुख मांग है कि उनकी मजदूरी दर को स्किल रेट के अनुसार बढ़ाया जाए, सेफ्टी सामान समय पर उपलब्ध कराया जाए, और वेतन का भुगतान समय पर किया जाए।

समिति के अध्यक्ष शिव कुमार पटेल और उपाध्यक्ष रहसलाल सूर्यवंशी ने बताया कि प्रबंधन के साथ कई बार पत्राचार और चर्चा के बावजूद उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते मजदूरों को शांतिपूर्ण हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।

मजदूरों की मांगें और समस्याएं

रहसलाल सूर्यवंशी ने बताया कि मजदूरों को सेफ्टी सामान जैसे रेनकोट, जूते, और अन्य उपकरण समय पर नहीं मिलते, जिससे बरसात और अन्य परिस्थितियों में काम करना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, वेतन का भुगतान भी समय पर नहीं होता, जिससे मजदूरों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शिव कुमार पटेल ने कहा कि एनटीपीसी प्रबंधन करोड़ों रुपये कमा रहा है, लेकिन बढ़ती महंगाई के दौर में मजदूरों को दी जा रही मजदूरी दर बहुत कम है। उन्होंने मांग की कि मजदूरों की सुविधाओं और वेतन वृद्धि पर ध्यान दिया जाए।

15-16 सालों से काम कर रहे मजदूर

हड़ताल में शामिल अधिकांश मजदूर पिछले 15 से 16 वर्षों से एनटीपीसी सीपत में काम कर रहे हैं। ये मजदूर भू-स्थापित हैं, जिन्हें जमीन अधिग्रहण के बाद नौकरी दी गई थी। मजदूर अलग-अलग ग्रेड में कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें नियमों के तहत मिलने वाली वेतन वृद्धि और सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। प्रबंधन का कहना है कि भुगतान दिल्ली से मिलने वाले आदेशों के अनुसार किया जा रहा है, लेकिन मजदूरों का आरोप है कि उनकी मांगों को लगातार अनदेखा किया जा रहा है।

देव शिल्पी मजदूर कल्याण समिति ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल अनिश्चितकाल तक जारी रहेगी। समिति के नेताओं ने बताया कि संसद और एनएसयूआई जिला अध्यक्ष मनमोहन राठौर ने भी इस मुद्दे पर प्रबंधन को पत्र लिखा था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मजदूर अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष करने को प्रतिबद्ध हैं।

एनटीपीसी सीपत के मजदूरों की हड़ताल ने प्रबंधन के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। बढ़ती महंगाई और काम की कठिन परिस्थितियों के बीच मजदूरों की मांगें जायज नजर आती हैं। अब यह देखना होगा कि प्रबंधन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और मजदूरों को उनका हक कब तक मिल पाता है।