कोरबा। कटघोरा वन मंडल अंतर्गत केंद्ई रेंज में आने वाले ग्राम कांपा नवापारा एवं उसके आसपास पिछले एक सप्ताह से लगभग 50 हाथियों का झुंड विचरण कर रहा है। झुंड से अलग एक हाथी ने ग्राम लालपुर में एक बालिका को रात में लघुशंका के लिए बाहर निकली बालिका को सूंड से पकड़ कर पटक दिया। घटना में बालिका घायल हो गई है।
ग्राम लालपुर में लरगंसाय एक्का अपने परिवार सहित निवास करता है। बीती रात लगभग तीन बजे जब उसकी 12 वर्षीय अनुष्का एक्का लघुशंका के लिए बाहर निकली तो एक भारी भरकम दंतैल हाथी आंगन में खड़ा था। बच्ची कुछ समझ नहीं पाई और हाथी ने उसे सूंड में लपेट कर वहीं पर पटक दिया, जिससे बच्ची बुरी तरह से घायल हो गई। तब तक घर वाले बच्ची की आवाज सुनकर बाहर निकले तो हाथी मौके से जंगल की ओर भाग चुका था। इसकी खबर मिलते ही गांव में हाथी के आने की दहशत फैल गई। इसके पश्चात घायल बच्ची को वाहन व्यवस्था कर पोड़ी उपरोड़ा अस्पताल लाया गया।
रायगढ़ में विचरण कर रहा 157 हाथियों का दल
प्रदेश में हाथियों को सबसे बड़ा झुंड रायगढ़ जिले में स्वच्छंद विचरण कर रहा है यहां के दोनों वनमंडल में 157 जंगली हाथियों के अलग अलग झुंड में 81 मादा 34 बच्चों की देखभाल संगठित होकर कर रहे हैं आलम यह है कि मानवद्वंद की घटनाओं से थर्राने वाले रायगढ़ जिले के अतिसंवेदन एवं संवेदनशील इलाके के आदिवासी बाहूल्य ग्रामीण इन दोनों वन विभाग की सक्रियता, समझाइए और अपील के चलते सुरक्षित स्तर पर नजर आ रहे हैं।
हालांकि हाथियों की बड़ी संख्या खेत खलिहान में विचरण करने से ग्रामीण किसानों को आर्थिक नुकसानी का भी सामना करना पड़ता है।
हाथी का स्वभाव बच्चों के प्रति काफी संवेदनशील रहता है यही वजह है कि वे संगठित होकर सुरक्षा घेरे में रहते है। वर्तमान मे रायगढ़ तथा आदिवासी बाहूल्य धरमजयगढ़ में कुल 157 हाथी है। यह रिकार्ड बीते 5 साल में सबसे अधिक हाथी होने का रिकार्डद दर्ज की है। दोनों वन मंडल में 34 बच्चे विचरण कर रहे है इनकी देखभाल में 81 मादा, नरहाथियों की मौजूदगी में सुरक्षित माहौल देने के लिए कटिबंध नजर आ रही है। बीते कुछ चालू की रिकॉर्ड की बात की जाए तो धर्म झगड़ा आंचल हाथियों की मौजूदगी तथा उनके तांडव से थर्राया था, गणेश नामक हाथी ने दर्जनों लोगों को मौत के घाट उतारा था। उस दौर में हाथियों की संख्या भी काफी कम थी। लेकिन हाथियों के आक्रामक स्वभाव से वन विभाग के कर्मचारियों तथा ग्रामीण जन भी भयभीत रहते थे। मौजूदा दौर में भी यही स्थिति धरमजयगढ़ वन मंडल के विभिन्न अतिसंवेदनशील तथा संवेदनशील ग्राम में नजर आ रही है। चूंकि जनहानि की संख्या कम होने से थोड़ी रहत है।
जबकि जिले के दोनों वन परिक्षेत्र में लंबे समय से हाथियो से आर्थिक नुकसान आए दिन हो रही है। रोज अलग-अलग गांव से जिन क्षेत्रों में हाथियों की मौजूदगी है वह इस तरह की घटनाएं आम हो चुकी है, शाम होते ही लोग अपने घरों में दुबके के रहते हैं।
दोनों वन मंडल में कहां कितने हाथी
रायगढ़ में 14 हाथी है।
नर 5
मादा 6
बच्चे 3
धरमजयगढ़ में 143 हाथी
बच्चे 34
नर 35
मादा 74
शाम होते ही चिंघाडने लगते हैं हाथी
एक दशक से धरमजयगढ़ में सबसे ज्यादा अधिक हाथी की मौजूदगी रहती है यहां करीब 147 गांव अति संवेदनशील है। इसमे आमगांव भी शामिल है। इसके अलावा लोटान में 34 हाथी एक साथ के ही झुंड में है। बीते दिन इस हाथी के दल का वीडियो भी इंटरनेट मीडिया में प्रसारित हुआ था। वही सोनाजोरी में 29 हाथी एक साथ विचरण कर रहे हैं इस तरह धर्मजयगढ़ में इन दो क्षेत्र में सबसे अधिक हाथी की मौजूदगी है। जबकि धर्मजयगढ़ नगर के इर्द गिर्द 21 हाथी 10 मादा के साथ 7 बच्चे है।
Editor – Niraj Jaiswal
Mobile – 9754876042
Email – urjadhaninewskorba@gmail.com
Address – Press Complex, T.P. Nagar, Korba C.G. 495677
















