हाथी देते हैं बच्चों को जेड प्लस सुरक्षा,मादा हाथी करती है नेतृत्व

हाथी के व्यवहार पर अध्ययन कर रहे जितेन्द्र


कोरबा । हाथी धरती का सबसे बड़ा जीव है, हाथी का गर्भकाल 22 महीनों का होता है, जो कि धरती के जीवों में सबसे लम्बा वक्त है। जन्म के समय हाथी का बच्चा कऱीब 104 किलो का होता है। हाथी अमूमन 50 से 70 वर्ष तक जीवित रहता है।

एशियाई सभ्यताओं में हाथी बुद्धिमत्ता का प्रतीक माना जाता है और अपनी स्मरण शक्ति तथा बुद्धिमानी के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ उनकी बुद्धिमानी डॉल्फिन तथा वनमानुषों के बराबर मानी जाती है। पर्यवेक्षण से पता चला है कि हाथी का कोई प्राकृतिक परभक्षी नहीं होता है,हालाँकि सिंह का समूह शावक या कमज़ोर जीव का शिकार करते देखा गया है। अब यह मनुष्य की दखल तथा अवैध शिकार के कारण संकट में है।


वाइल्डलाइफ रेस्क्यु टीम प्रमुख जितेंद्र सारथी ने बताया कि वे लंबे समय से हाथी पर काम कर रहे हैं। हाथी के व्यवहार पर अध्यन कर रहे हैं साथ ही समझने की कोशिश करते हैं। वे बताते हैं हाथी इंसानों की तरह समूह और परिवार के साथ रहते हैं वहीं बेहद संवेदनशील होते है। लंबे समय से हाथी पर काम करने पर देखा गया कि हाथी एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाते समय अपने पूर्वज के द्वारा चले हुए रास्ते का ही उपयोग करते हैं अपने सूंघने की गजब की शक्ति से कोसों दूर पानी और भोजन तक पहुंच जाते हैं।

हाथी अपने समूह के साथ विचरण करते हुए एक-दूसरे से लगातार ध्वनि तरंग से सम्पर्क करते हैं। उसके साथ झुंड का नेतृत्व समूह की उम्रदराज मादा करती हैं, जो बच्चों का विशेष ध्यान रखती हैं और बच्चों को जेड प्लस सुरक्षा घेरे में रखती हैं।


हाथी एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक विचरण करते हुए अपना लीद छोड़ते जाते हैं जिसमें कई पेड़ों के बीज होने से यहां-वहां फैल कर पौधे के रूप में अंकुरित हो जाते हैं और पेड़ का रूप ले लेते हैं। दूसरी तरफ इंसान अपने स्वार्थ के लिए हजारों पेड़ों को काट देता है।

आज सच मायने में हाथी अपने वजूद के लिए लड़ रहे हैं अंधाधुंध जंगल कटाई और उनके रहवास की कमी के कारण मानव-हाथी द्वंद बढ़ते जा रहे हैं। इसी तरह उनका रहवास कम होता गया तो आने वाले समय में हाथी मानव-द्वंद बढ़ते जाएगा।

हम सभी को हाथियों के लिए सोचना पड़ेगा कि अगर हाथी पूरी तरह विलुप्त हो जाएं तो हमारा जंगल भी पूरी तरह खत्म हो जाएगा। आईए, हम सब मिलकर हाथी को बचाने का आज विश्व हाथी दिवस पर संकल्प लें और उनको बचाएं।