छत्तीसगढ़ के पांच शक्तिपीठ, चारों दिशाओं में विराजती हैं मां भवानी

डोंगरगढ़ की बम्लेश्वरी से दंतेवाड़ा की दंतेश्वरी तक, नवरात्रि में उमड़ता है श्रद्धा का सैलाब

छत्तीसगढ़ की धरती प्राचीन काल से ही शिवोपासना और शक्तिपूजा की परंपरा के लिए प्रसिद्ध रही है। यहां मां दुर्गा के अनेक प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।

इनमें डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया, चंद्रपुर की मां चंद्रहासिनी और महासमुंद जिले के खल्लारी स्थित मां खल्लारी देवी के मंदिर विशेष महत्व रखते हैं। इन पांचों देवी धामों में वर्षभर श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं, जबकि नवरात्रि के दौरान यहां भक्ति और उत्साह का विशेष वातावरण रहता है।

लोकमान्यताओं के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में विराजमान इन देवी स्वरूपों की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इन मंदिरों का धार्मिक महत्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि इनसे छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकपरंपराएं भी जुड़ी हुई हैं। प्राचीन काल से देवी मंदिरों में जवारा बोने और अखंड ज्योति कलश प्रज्ज्वलित करने की परंपरा रही है, जो आज भी अनेक स्थानों पर निभाई जाती है।

डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, पहाड़ी पर विराजमान हैं बड़ी माता

राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में स्थित मां बम्लेश्वरी देवी का मंदिर प्रदेश के प्रमुख देवी धामों में शामिल है। यहां पहाड़ी की लगभग एक हजार फीट ऊंचाई पर बड़ी बम्लेश्वरी माता का मंदिर है, जबकि नीचे धरातल पर छोटी बम्लेश्वरी देवी का मंदिर स्थित है। मान्यता है कि बड़ी माता के दर्शन के बाद छोटी माता के दर्शन भी किए जाने चाहिए।

नवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य मेला लगता है और लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। डोंगरगढ़ प्राकृतिक सुंदरता से भी समृद्ध है। चारों ओर फैली हरियाली, पहाड़ियां और जलाशय इस क्षेत्र की खूबसूरती बढ़ाते हैं। धार्मिक आस्था और प्राकृतिक वातावरण के कारण यह स्थान श्रद्धालुओं के साथ पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी है।

बस्तर की आराध्य देवी हैं मां दंतेश्वरी

दंतेवाड़ा जिले में स्थित मां दंतेश्वरी का मंदिर बस्तर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। मां दंतेश्वरी को बस्तर क्षेत्र की आराध्य देवी और वहां के राजपरिवार की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। प्रचलित मान्यता के अनुसार, देवी की प्रतिमा वारंगल से बस्तर लाई गई थी और बाद में शंखिनी तथा डंकनी नदियों के संगम क्षेत्र के निकट स्थापित की गई। देवी के नाम पर ही दंतेवाड़ा नगर का नाम पड़ने की मान्यता है।

पौराणिक परंपरा में इस मंदिर को 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां देवी सती का दांत गिरा था। बस्तर की दशहरा परंपरा और राजपरिवार की धार्मिक मान्यताओं में भी मां दंतेश्वरी का विशेष स्थान रहा है।

जगदलपुर के राजमहल परिसर में भी मां दंतेश्वरी का मंदिर है, जहां श्रद्धालु दर्शन-पूजन करते हैं।

रतनपुर की मां महामाया, श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र

बिलासपुर से लगभग 28 किलोमीटर दूर रतनपुर में स्थित मां महामाया का मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख प्राचीन देवी मंदिरों में गिना जाता है। रतनपुर ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा है और यहां के देवी मंदिर से अनेक धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

लोकमान्यता के अनुसार, मां महामाया का सिर रतनपुर में तथा धड़ अंबिकापुर क्षेत्र में स्थित है। इस मान्यता से जुड़ी विभिन्न कथाएं प्रचलित हैं। सरगुजा क्षेत्र के अंबिकापुर में भी महामाया देवी का प्रसिद्ध मंदिर है, जहां पहाड़ी पर विराजमान माता की पूजा की जाती है। इसी तरह रायपुर के पुरानी बस्ती क्षेत्र में स्थित मां महामाया मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इन मंदिरों में नवरात्रि के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।

महानदी तट पर विराजमान हैं मां चंद्रहासिनी

रायगढ़ जिले के चंद्रपुर में महानदी के तट पर स्थित मां चंद्रहासिनी देवी का मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष लोकप्रिय है। मां चंद्रहासिनी को चंद्रसेनी देवी के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर की स्थापना और चंद्रपुर नगर के नाम को लेकर कई लोककथाएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि देवी सरगुजा क्षेत्र से आकर महानदी के तट पर विराजमान हुईं।

नवरात्रि में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर परिसर और पहाड़ी मार्ग पर धार्मिक प्रसंगों से जुड़ी कलाकृतियां तथा हनुमान और अर्द्धनारीश्वर की विशाल प्रतिमाएं आकर्षण का केंद्र हैं। महानदी के तट पर स्थित होने के कारण मंदिर का प्राकृतिक परिवेश भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

पहाड़ी पर विराजमान हैं मां खल्लारी

महासमुंद जिले में स्थित मां खल्लारी का मंदिर प्रदेश के प्रमुख देवी धामों में शामिल है। यह मंदिर पहाड़ी पर स्थित है और यहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सीढ़ियों से होकर गुजरना पड़ता है। वर्षभर भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि नवरात्रि के दौरान विशेष चहल-पहल रहती है।

मां खल्लारी के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। धार्मिक आयोजनों और पर्वों के अवसर पर यहां भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। पहाड़ी पर स्थित मंदिर और आसपास का प्राकृतिक वातावरण इस धाम को विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।

आस्था, इतिहास और परंपरा के संगम हैं पांचों धाम
छत्तीसगढ़ के ये पांच देवी धाम प्रदेश की धार्मिक विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। कहीं पहाड़ी पर विराजमान मां बम्लेश्वरी और खल्लारी देवी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं, तो कहीं महानदी तट की मां चंद्रहासिनी और बस्तर की आराध्य मां दंतेश्वरी लोकआस्था की परंपरा को आगे बढ़ाती हैं।

रतनपुर की मां महामाया का मंदिर भी ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से विशिष्ट स्थान रखता है।

नवरात्रि के दौरान इन मंदिरों में पूजा-अर्चना, ज्योति कलश और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से भक्ति का वातावरण निर्मित होता है। ये शक्तिपीठ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध करते हुए पीढ़ियों से चली आ रही देवी उपासना की परंपरा को जीवंत बनाए हुए हैं।