पाटीदार भवन और जलाराम मंदिर में गरबा की धूम, कॉलोनियों में भी उमड़ रही भीड़
कोरबा।शारदीय नवरात्र में कोरबा माता रानी की भक्ति और गरबा के रंग में रंगा हुआ है। देवी मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है, वहीं दुर्गा पंडालों में भक्ति गीतों की धुन पर गरबा और डांडिया की धूम मची हुई है। पारंपरिक परिधानों में सजे महिला-पुरुष, युवा और बच्चे उत्साह के साथ इस उत्सव में शामिल हो रहे हैं। शहर में गरबा की रौनक के बीच इसकी शुरुआत और सांस्कृतिक विरासत की कहानी भी लोगों का ध्यान खींच रही है।
गुजरात से आए परिवारों ने रोपी परंपरा की नींव
कोरबा में गरबा की परंपरा का इतिहास यहां आकर बसे गुजराती परिवारों से जुड़ा हुआ है। विद्युत संयंत्रों और कोयला खदानों की स्थापना के दौर में व्यवसाय और रोजगार की तलाश में गुजरात से अनेक परिवार तत्कालीन अविभाजित मध्य प्रदेश के कोरबा क्षेत्र पहुंचे। ये परिवार अपने साथ अपनी भाषा, खानपान और सामाजिक परंपराओं के साथ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी लेकर आए। इसी विरासत का हिस्सा रहे गरबा के आयोजन शुरुआत में सीमित स्तर पर होते थे। समय के साथ इन आयोजनों का विस्तार हुआ और गरबा ने शहर के सांस्कृतिक जीवन में अपनी अलग पहचान बना ली।
आज गरबा केवल गुजराती समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न समुदायों के लोग भी इसमें उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। नवरात्र के दौरान गरबा और डांडिया के आयोजन शहर में सामूहिक उल्लास, सामाजिक मेलजोल और धार्मिक आस्था का अनूठा संगम प्रस्तुत करते हैं।
पाटीदार भवन और जलाराम मंदिर में विशेष आकर्षण
शारदीय नवरात्र के अवसर पर ट्रांसपोर्ट नगर स्थित पाटीदार भवन और जलाराम मंदिर परिसर में आयोजित गरबा लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां पारंपरिक स्वरूप में गरबा आयोजन के साथ भक्ति और सांस्कृतिक मर्यादा को विशेष महत्व दिया जाता है। आयोजन में समय की पाबंदी और निर्धारित नियमों के पालन पर जोर दिया जाता है।
अनावश्यक आडंबर से दूर रहकर मां भगवती की आराधना को केंद्र में रखने की परंपरा इन आयोजनों को विशिष्ट पहचान देती है।
यहां गरबा महज नृत्य और मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और सामूहिक आस्था को अभिव्यक्त करने का अवसर भी है।
कॉलोनियों में भी गरबा की धूम, नियमों के पालन पर जोर
शहर के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नगर फेज-1 और फेज-2, महाराणा प्रताप नगर, सीएसईबी कॉलोनी, सीसीएल कॉलोनी, सुभाष ब्लॉक और भगत सिंह कॉलोनी सहित अनेक इलाकों में आयोजन समितियों की ओर से गरबा और डांडिया की व्यवस्था की गई है। इन आयोजनों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और युवा शामिल हो रहे हैं।
व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए आयोजन समितियों ने अपने स्तर पर नियम और मापदंड निर्धारित किए हैं। इनके पालन पर जोर दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल में उत्सव का आनंद ले सकें।
पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों की रंग-बिरंगी प्रस्तुतियां और गरबा की लयबद्ध थाप नवरात्र के उल्लास को और बढ़ा रही हैं।
आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का उत्सव
कोरबा में गरबा की बढ़ती लोकप्रियता इस बात का उदाहरण है कि किस तरह रोजगार और व्यवसाय के सिलसिले में दूसरे प्रदेशों से आए परिवार अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को नई जगह पर भी जीवंत बनाए रखते हैं। गुजराती परिवारों द्वारा शुरू की गई यह परंपरा आज शहर के व्यापक सामाजिक जीवन का हिस्सा बन चुकी है। नवरात्र के दौरान गरबा के आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामाजिक एकता को भी मजबूती दे रहे हैं।
Editor – Niraj Jaiswal
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