झीरम घाटी की कथित राजनीतिक साजिश की जांच कब होगी : जयसिंह

एनआईए कोर्ट के फैसले को बताया आधा-अधूरा न्याय, नेताओं सहित 32 लोगों की हुई थी हत्या

कोरबा। झीरम घाटी कांड में एनआईए कोर्ट द्वारा 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद कांग्रेस ने फैसले को आधा-अधूरा न्याय करार दिया है। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि अदालत ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर फैसला सुनाया है, लेकिन घटना के पीछे कथित राजनीतिक साजिश के पहलुओं की जांच अब तक क्यों नहीं हुई, यह बड़ा सवाल है।

मीडिया से बातचीत में जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि 23 मई 2013 को हुए झीरम घाटी हमले में कांग्रेस नेताओं सहित 32 लोगों की हत्या हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया। कई लोगों के बयान तक नहीं लिए गए और कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों की जांच नहीं की गई।

उन्होंने कहा कि घटना के कई सप्ताह बाद तक मृतकों और घायलों के पर्स, फाइलें तथा महत्वपूर्ण दस्तावेज घटनास्थल पर पड़े रहे। कई मामलों में मोबाइल फोन तक जब्त नहीं किए गए। ऐसे में जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

गणपति और रमन्ना के नाम चार्जशीट से क्यों हटे?
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस लगातार इस मामले में कुछ प्रमुख नक्सली नेताओं की भूमिका और जांच को लेकर सवाल उठाती रही है। उनके अनुसार गणपति उर्फ मुप्पला लक्ष्मण राव और रमन्ना सहित 26 फरार आरोपियों के खिलाफ 21 मार्च 2014 को गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे। इसके बावजूद बाद की चार्जशीट में इन नामों को क्यों हटाया गया, इसका जवाब सामने आना चाहिए।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देवा उर्फ बारसे सुक्का, जिसे एनआईए की जांच में झीरम घटना में शामिल नक्सलियों में बताया गया था और जिस पर इनाम भी घोषित था, उससे पूछताछ क्यों नहीं की गई।

जांच के दायरे से बाहर रहे कई नाम : कांग्रेस
पूर्व मंत्री ने कहा कि ऐसे कई नाम और तथ्य हैं, जो जांच की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बने। कांग्रेस का आरोप है कि इन पहलुओं की अनदेखी के पीछे कथित राजनीतिक साजिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि जब तक इन सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक झीरम घाटी कांड की पूरी तस्वीर साफ नहीं हो सकती।

पत्रवार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष शहर मनोज चौहान, ग्रामीण अध्यक्ष मुकेश राठौर, पूर्व महापौर राजकिशोर प्रसाद सहित अन्य कांग्रेस नेता उपस्थित थे।