मानिकपुर माइंस से हनुमान चौक मार्ग बदहाल, कीचड़ में फंस रहे ट्रक-ट्रेलर

बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें, भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क की हालत और बिगड़ी; जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की मांग

कोरबा। एसईसीएल कोरबा एरिया की मानिकपुर खदान से हनुमान चौक की ओर जाने वाला प्रमुख मार्ग इन दिनों बदहाली और कीचड़ की समस्या से जूझ रहा है। लगातार बारिश के कारण मार्ग के कई हिस्सों में सड़क के बजाय कीचड़ का कब्जा नजर आ रहा है। इसी मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में कोयला लदे भारी वाहनों की आवाजाही होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। कई बार ट्रक-ट्रेलर कीचड़ में फंस जाते हैं, जिससे वाहनों की लंबी कतार लगने के साथ यातायात भी प्रभावित हो रहा है।

मानिकपुर खदान में मौजूदा क्षमता के अनुरूप कोयला खनन और परिवहन गतिविधियां जारी हैं। कोयला परिवहन के लिए एसईसीएल प्रबंधन की ओर से आउटसोर्सिंग कंपनियों के साथ निजी ट्रांसपोर्टरों को भी काम में लगाया गया है। इसके चलते प्रतिदिन सैकड़ों कोयला लदे वाहन इस मार्ग से होकर विभिन्न क्षेत्रों की ओर आते-जाते हैं। भारी वाहनों के लगातार दबाव और बारिश के पानी की समुचित निकासी नहीं होने के कारण सड़क कई जगहों पर दलदल में तब्दील हो गई है।

कीचड़ में फंस रहे वाहन, लग रहा जाम

मार्ग की बदहाली का सबसे ज्यादा असर भारी वाहनों के आवागमन पर पड़ रहा है। कीचड़ में वाहन फंसने के बाद उन्हें निकालने के लिए अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती है। एक वाहन के फंसते ही पीछे आने वाले वाहनों की कतार लग जाती है और यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है।

ट्रक-ट्रेलर चालकों का कहना है कि खराब सड़क और कीचड़ के कारण वाहनों के टायर, सस्पेंशन और अन्य कल-पुर्जों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इससे वाहनों में टूट-फूट की आशंका बढ़ने के साथ परिवहन लागत भी बढ़ रही है। चालकों को कीचड़ वाले हिस्सों से वाहन निकालने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ड्रेनेज निर्माण ही स्थायी समाधान

मानिकपुर खदान क्षेत्र में बरसाती पानी और जलभराव की समस्या को देखते हुए प्रभावी ड्रेनेज व्यवस्था की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह जानकारी सामने आई है कि जल निकासी व्यवस्था विकसित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कई करोड़ रुपये की लागत से कार्य स्वीकृत भी बताया जा रहा है। हालांकि, जमीनी स्तर पर काम की वर्तमान स्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि केवल सड़क की ऊपरी सतह की मरम्मत करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। जब तक बारिश के पानी की निकासी के लिए व्यवस्थित ड्रेनेज का निर्माण नहीं किया जाता, तब तक हर बारिश में सड़क पर कीचड़ और जलभराव की स्थिति दोहराती रहेगी।

कोयला परिवहन के लिए महत्वपूर्ण मार्ग

मानिकपुर खदान से जुड़े कोयला उत्पादन और परिवहन को देखते हुए यह मार्ग काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में सड़क की बदहाली सीधे परिवहन व्यवस्था को प्रभावित कर रही है। वाहन चालकों ने सड़क की तत्काल मरम्मत के साथ-साथ ड्रेनेज निर्माण का काम जल्द शुरू कराने की मांग की है।

उनका कहना है कि सड़क सुधार और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था होने से न केवल कोयला परिवहन सुचारू होगा, बल्कि वाहनों के फंसने, जाम और बार-बार होने वाली टूट-फूट की समस्या से भी राहत मिलेगी।