सरकारी जमीन पर अवैध खेती का मामला: कागजों में दौड़ी जांच, मौके पर नहीं पहुंची टीम

पशु चिकित्सालय की भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत, 10 सदस्यीय जांच दल के गठन के बाद भी रिपोर्ट लंबित

कोरबा-बरपाली। शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण और अवैध खेती की शिकायत के बाद बरपाली तहसीलदार द्वारा जांच के आदेश जारी किए जाने के बावजूद अब तक न तो मौके पर प्रभावी जांच हुई है और न ही न्यायालय में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है। इससे राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

मामला ग्राम बरपाली स्थित शासकीय पशु चिकित्सालय की भूमि का है। पशु चिकित्सा विभाग ने 17 जुलाई 2026 को ग्राम पंचायत को पत्र जारी कर बताया था कि नवीन पशु चिकित्सालय भवन शासकीय भूमि खसरा नंबर 113/1क पर निर्मित है। विभाग ने पत्र में उल्लेख किया था कि भवन के आसपास की शासकीय भूमि पर कुछ लोगों द्वारा खेती की जा रही है, जिससे शासकीय संपत्ति की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। विभाग ने ग्राम पंचायत से अवैध खेती रुकवाने की मांग की थी।

इसके बाद ग्राम पंचायत ने तहसील कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया। मामले को गंभीर मानते हुए 27 जुलाई 2026 को तहसीलदार बरपाली ने राजस्व निरीक्षक एवं 9 पटवारियों सहित 10 सदस्यीय जांच दल का गठन किया।

आदेश में तीन दिनों के भीतर स्थल निरीक्षण कर राजस्व अभिलेखों का मिलान, पंचनामा, खसरा एवं नक्शे सहित विस्तृत जांच प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।

हालांकि आदेश जारी होने के कई दिन बाद भी न तो जांच दल द्वारा प्रभावी स्थल निरीक्षण किए जाने की पुष्टि हुई है और न ही न्यायालय में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। इससे सवाल उठ रहे हैं कि जब तीन दिन की समय-सीमा तय की गई थी, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी भूमि पर कब्जे की शिकायत लंबे समय से की जा रही है, लेकिन कार्रवाई केवल आदेशों तक सीमित दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो शासकीय संपत्ति की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है।

अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि जांच रिपोर्ट कब प्रस्तुत होगी, जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी और शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रशासन कब प्रभावी कदम उठाएगा।