कोरबा। एसईसीएल की कुसमुंडा खदान एक बार फिर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चर्चा में है।
आरोप है कि कुछ बड़े औद्योगिक समूहों को कथित रूप से अनुचित तरीके से करीब 282 करोड़ रुपये का रिफंड जारी कर कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। मामले को संगठित वित्तीय अपराध बताते हुए इसकी शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) तक भेजी गई है।
आरटीआई के माध्यम से जुटाई गई जानकारी के आधार पर शिकायतकर्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र साहू ने आरोप लगाया है कि उच्च गुणवत्ता वाले कोयले को कागजों में निम्न श्रेणी का दर्शाकर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया। शिकायत में कहा गया है कि कोयले के ग्रेड की हेराफेरी कर ‘जी-15’ और ‘जी-17’ जैसी निम्न गुणवत्ता दिखाकर अडाणी पावर, वेदांता और आरकेएम जैसे समूहों को कथित रूप से करोड़ों रुपये का फायदा पहुंचाया गया।
शिकायत में यह भी मांग की गई है कि क्वालिटी कंट्रोल इंस्टीट्यूट और कोल इंडिया फॉरेंसिक से जुड़ी लैब रिपोर्ट तथा सैंपलिंग प्रक्रिया का डिजिटल फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
आरोप लगाया गया है कि कुसमुंडा खदान में जानबूझकर पत्थर और मिट्टी मिलाकर कोयले की गुणवत्ता घटाने का खेल किया गया, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा।
पत्र में यह भी दावा किया गया है कि यह केवल वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि सार्वजनिक उपक्रम के कुछ अधिकारियों और निजी कॉर्पोरेट समूहों के बीच संभावित सांठगांठ का मामला हो सकता है। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इस प्रकार की गतिविधियां अन्य खदानों में भी जारी रह सकती हैं।
गौरतलब है कि कोरबा जिले की खदानों में पहले भी कोयले की गुणवत्ता में हेराफेरी और भ्रष्टाचार के मामले सामने आ चुके हैं। कई मामलों में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई भी की, लेकिन अपेक्षित स्तर पर परिणाम सामने नहीं आने से ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति की आशंका लगातार बनी हुई है।
Editor – Niraj Jaiswal
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