कोरबा। धान उपार्जन केंद्रों में हाल ही में नियुक्त किए गए कंप्यूटर ऑपरेटरों को अचानक काम से हटा दिया गया है। उन्हें यह कहते हुए बाहर कर दिया गया कि सरकारी टेंडर रद्द कर दिया गया है, जबकि ऑपरेटरों ने 15 दिन तक लगातार काम किया, जिसका वेतन अब तक नहीं दिया गया है।
इन युवाओं ने दूसरी नौकरियाँ छोड़कर इस काम को ज्वाइन किया था, लेकिन अब नौकरी छूटने के साथ उनका वेतन भी डूब गया है, जिससे भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस निर्णय को प्रभावित ऑपरेटरों ने अनीतिपूर्ण बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर जताई नाराजगी
कोरबा जिले के विभिन्न धान उपार्जन केंद्रों के ऑपरेटर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के फैसले के खिलाफ नाराजगी जताई। सहकारी समिति कर्मचारी संघ की हड़ताल और धान खरीदी में देरी को देखते हुए इन ऑपरेटरों की अस्थायी भर्ती की गई थी।
इनमें से कई लोग दूसरी जगह कार्यरत थे, जिन्हें इस उम्मीद में नई ड्यूटी दी गई कि सीजन भर काम मिलेगा। मगर हड़ताल खत्म होते ही प्रशासन की ओर से टेंडर निरस्तीकरण का हवाला देकर उन्हें बाहर कर दिया गया।
“15 दिन काम लिया, लेकिन पैसा नहीं दिया”
हरदी बाजार उपार्जन केंद्र में कार्यरत ऑपरेटर श्वेता तिवारी ने कहा,
“हमसे 15 दिन तक पूरा काम कराया गया, लेकिन अब वेतन भी नहीं मिला। हमारा नुकसान कौन भरेगा?”
कानूनी लड़ाई की चेतावनी
ऑपरेटर यूनियन के सदस्यों ने बताया कि सरकार ने खुद टेंडर जारी किया था और उन्हीं की निगरानी में काम भी कराया गया, लेकिन अब अचानक टेंडर रद्द बताकर उन्हें हटाना गलत है।
उन्होंने कहा कि यह अन्यायपूर्ण कार्रवाई है और इसके विरोध में प्रदेश स्तरीय आंदोलन व कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
Editor – Niraj Jaiswal
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