हाथियों का बढ़ता कहर: किसानों की मेहनत तबाह, सुरक्षा पर सवाल

कोरबा। जिले में हाथियों का उत्पात लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे किसानों की चिंता और परेशानी दोनों गहराती जा रही हैं। बालकोनगर रेंज में विचरण कर रहे 12 हाथियों के झुंड ने 17 किसानों की फसल रौंद डाली, जबकि कोरबा वन मंडल क्षेत्र में अब तक 26 किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। खेतों में खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुंचने से किसान असमंजस में हैं कि दोष किसे दें अपनी किस्मत को या हाथियों की बढ़ती मौजूदगी को।

खबर के अनुसार कई क्षेत्रों में किसान धान की कटाई करने से भी डर रहे हैं। उनका कहना है कि फसल दोबारा लगाई जा सकती है, लेकिन जिंदगी वापस नहीं आती। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बालकोनगर रेंज में फॉरेस्ट अमला सिर्फ दावे कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही। हालात ऐसे हैं कि लोगों को अपनी जान और संपत्ति की रक्षा के लिए रातें जागकर गुजारनी पड़ रही हैं।

बालको के अलावा करतला रेंज में भी हाथियों के छह अलग-अलग झुंड सक्रिय हैं। जानकारी के अनुसार ग्राम बेहरचुंआ में सक्ती रेंज से आए 11 हाथी, ग्राम केराकछार में 3 हाथी और एक अन्य झुंड में 6 हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। नोनबिर्रा क्षेत्र में 17 हाथी लगातार आसपास की फसलों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। इसके अलावा ग्राम नवापारा और कोटमेर में एक-एक दंतैल हाथी झुंड से अलग होकर घूम रहा है, जबकि कोरबा रेंज के गेंराव गांव में भी एक दंतैल हाथी देखा गया है।

लगातार बढ़ते हाथी आतंक ने किसानों के सामने रोजी-रोटी और सुरक्षा दोनों का संकट खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग प्रभावी कदम उठाए ताकि जन-धन और फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।