कोरबा।छत्तीसगढ़ के गठन के 25 वर्षों में रेशम विभाग ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। टसर और मलबरी रेशम उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति के साथ-साथ यह विभाग ग्रामीणों की आयवृद्धि, महिला सशक्तिकरण और सतत विकास की दिशा में प्रभावी योगदान दे रहा है।
टसर उत्पादन में राष्ट्रीय पहचान
छत्तीसगढ़ ने टसर उत्पादन में देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। कोरबा जिले के पांचों विकासखंडों में 49 टसर केंद्रों के माध्यम से उत्पादन हो रहा है। वर्ष 2000 में 1030 हेक्टेयर में टसर उत्पादन होता था, जो 2025 तक बढ़कर 1199 हेक्टेयर हो गया। टसर ककून उत्पादन 2000 में 67.1 करोड़ नग से बढ़कर 2024-25 में 108.56 करोड़ नग और 2025-26 में सितंबर तक 49.30 करोड़ नग हो चुका है।



हितग्राहियों की संख्या में वृद्धि
रेशम योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की संख्या 2000 में 1756 थी, जो 2024-25 तक बढ़कर 2759 हो गई। वर्ष 2025-26 में सितंबर तक 1523 हितग्राही और श्रमिक लाभान्वित हुए हैं, जो ग्रामीण आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
मलबरी उत्पादन से नई राह
जिले में 7 मलबरी रेशम केंद्र संचालित हैं, जहां 2025 में 51 एकड़ में उत्पादन हो रहा है। मलबरी ककून उत्पादन 2000 में 3126 किग्रा से बढ़कर 2024-25 में 5052 किग्रा और 2025-26 में सितंबर तक 1484 किग्रा हो चुका है। मलबरी योजनाओं से 2024-25 में 487 हितग्राही लाभान्वित हुए।
महिला सशक्तिकरण और स्व-सहायता समूह
रेशम विभाग ने स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार और सशक्तिकरण का अवसर प्रदान किया है। वर्तमान में टसर योजना में 26, मलबरी योजना में 7 और धागाकरण कार्य में 14 स्व-सहायता समूह कार्यरत हैं।
निजी भूमि पर शहतूत पौधारोपण
सिल्क समग्र योजना के तहत 2021-22 से 2025-26 तक 45 एकड़ में 45 लघु-सीमांत कृषकों की निजी भूमि पर शहतूत पौधारोपण पूरा किया गया। 2025-26 में अतिरिक्त 14 एकड़ में 14 कृषकों की भूमि पर पौधारोपण हुआ है।
रेशम विभाग की योजनाओं ने कोरबा में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी उन्नयन और नवाचार के साथ भविष्य में और अधिक हितग्राहियों को जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण सशक्तिकरण को और बल मिलेगा।
Editor – Niraj Jaiswal
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