मां सर्वमंगला मंदिर से निकली भव्य विसर्जन यात्रा, मांदर की थाप, कर्मा नृत्य और आतिशबाजी के बीच हसदेव घाट पर विसर्जित किए गए जवारा कलश
कोरबा। मां सर्वमंगला देवी मंदिर, दुरपा में नौ दिवसीय शारदीय नवरात्र के समापन पर सोमवार की गोधूलि बेला में आस्था, भक्ति और परंपरा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। मंदिर में स्थापित 181 जवारा कलशों के विसर्जन के लिए जब 181 नारी शक्तियां अपने सिर पर कलश रखकर कतारबद्ध होकर हसदेव नदी की ओर रवाना हुईं, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। ज्योति कलशों की रोशनी से जगमगाती यात्रा शुभता, समृद्धि और विश्व शांति का संदेश देती नजर आई। मांदर की थाप, कर्मा नृत्य, जसगीत और आतिशबाजी के बीच निकली इस यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।

पूजा-अर्चना के बाद नारी शक्ति के सिर पर रखे गए कलश
क्वांर शुक्ल नवमी, विक्रम संवत 2083 के अवसर पर मां सर्वमंगला मंदिर के प्रबंधक एवं राजपुरोहित नमन पाण्डेय (नन्हा महाराज) ने मां के श्रीचरणों में नमन कर नौ दिनों तक चली पूजा-अर्चना और सेवा के लिए आशीर्वाद मांगा। उन्होंने कोरबा की समृद्धि, खुशहाली और सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हुए जवारा कलश विसर्जन की अनुमति मांगी।
इसके बाद जवारा कलश स्थापना कक्ष में स्थापित 181 कलशों की विधि-विधान से पूजा की गई। कलशों को नारी शक्तियों के सिर पर स्थापित करने के बाद यात्रा पाण्डेय परिवार के निवास के सामने पहुंची। यहां परिवार की मुखिया एवं नमन पाण्डेय की माताश्री गीता देवी पाण्डेय के सानिध्य में नारी शक्तियों की पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान बैगाओं की पारंपरिक रस्में भी संपन्न कराई गईं।
मांदर की थाप और कर्मा नृत्य के बीच निकली यात्रा
चुनरी से घिरी यात्रा में मांदर की गूंज और कर्मा नृत्य ने विशेष आकर्षण पैदा किया। आतिशबाजी के बीच 181 महिलाएं सिर पर जवारा कलश रखकर हसदेव नदी की ओर बढ़ीं। अंधेरे में ज्योति कलशों की रोशनी का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। पूरा वातावरण भक्ति और उल्लास से सराबोर हो गया।

यात्रा के दौरान मंदिर परिसर स्थित काली मंदिर के पास भी एक भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला। पारंपरिक अनुष्ठान में शामिल एक बैगा काली मां के दर्शन के दौरान भावावेश में जोर-जोर से चिल्लाने लगा और मंदिर की ओर बढ़ा। वहां मौजूद पुजारी ने उसे शांत कराया, जिसके बाद यात्रा आगे बढ़ी। रास्ते में जसगीत, आतिशबाजी और विभिन्न पारंपरिक वेशभूषाओं में शामिल लोगों ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हसदेव घाट पर विसर्जन
हसदेव घाट पहुंचने के बाद नमन पाण्डेय ने जवारा कलशों की पुनः पूजा-अर्चना की। बैगाओं ने पारंपरिक विधि-विधान पूरे किए और नारी शक्तियों के सिर से एक-एक कर कलश उतारकर नदी में विसर्जित किए गए। इस दौरान सभी के कल्याण, घर-घर समृद्धि और विश्व में शांति की कामना की गई।
मंदिर में मां सिद्धिदात्री के दर्शन के लिए पहुंचे हजारों श्रद्धालु भी विसर्जन यात्रा और ज्योति कलशों के प्रकाश को निहारते रहे। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
12 हजार ज्योति कलशों की स्थापना करने वाले भक्तों का आभार
नौ दिवसीय शारदीय नवरात्र के सफल समापन पर नमन पाण्डेय ने कहा कि मां सर्वमंगला की कृपा सभी पर बनी रहे। कोरबा, छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया के सभी जीवों का कल्याण हो, लोगों का जीवन सुखमय बने और विश्व में शांति स्थापित हो।
उन्होंने नवरात्र के दौरान अनुशासन बनाए रखने वाले श्रद्धालुओं, 12 हजार ज्योति कलश प्रज्ज्वलित कराने वाले भक्तों, जिला प्रशासन, नगर निगम प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिस जवानों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने पूजा-अर्चना संपन्न कराने वाले आचार्यों, पंडितों, मंदिर के सेवादारों और प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी लोगों को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कामना की कि मां सर्वमंगला सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें और सबका कल्याण करें।
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