2027 तक असाक्षरों को साक्षर बनाने का लक्ष्य, पुणे में शोध आंकड़ों और रिपोर्ट पर हुआ मंथन
कोरबा। उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन और साक्षरता संबंधी शोध निष्कर्षों की समीक्षा के लिए 13 से 15 अक्टूबर तक पुणे में राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी), नई दिल्ली के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यशाला में कोरबा जिले की जिला परियोजना अधिकारी श्रीमती ज्योति शर्मा ने सहभागिता की।
कार्यशाला में साक्षरता संबंधी शोध के आंकड़ों का विश्लेषण करने, विभिन्न राज्यों से प्राप्त आंकड़ों की समीक्षा करने और उनके आधार पर रिपोर्ट को अंतिम रूप देने पर चर्चा की गई। इसका उद्देश्य उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के क्रियान्वयन को प्रभावी बनाना और साक्षरता के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का आकलन करना था।
विद्यार्थियों को भी साक्षरता अभियान से जोड़ने की पहल
कार्यक्रम के तहत वर्ष 2027 तक असाक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को अभियान से जोड़कर असाक्षर व्यक्तियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों को 10 असाक्षर व्यक्तियों को पढ़ाने पर बोर्ड परीक्षा में 10 बोनस अंक देकर प्रोत्साहित करने की व्यवस्था भी की गई है।
श्रीमती ज्योति शर्मा ने बताया कि अभियान के तहत असाक्षर व्यक्तियों का पंजीयन कर उन्हें साक्षर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। विद्यार्थियों की भागीदारी से अभियान को गति मिलने और अधिक से अधिक लोगों तक शिक्षा पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
Editor – Niraj Jaiswal
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