कोयला परिवहन को रफ्तार, यात्री ट्रेनों की लेटलतीफी से हाहाकार!

यशवंतपुर एक्सप्रेस 7 घंटे देरी से छूटेगी, शिवनाथ और छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस भी समय पर नहीं

कोरबा।कोरबा से चलने वाली यात्री ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है। कोयला परिवहन के लिए महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में मालगाड़ियों का परिचालन जारी है, लेकिन यात्री ट्रेनों की समयबद्धता पर सवाल उठ रहे हैं। नवरात्र और दशहरा के त्योहारी सीजन में यात्रियों की आवाजाही बढ़ने के बावजूद ट्रेनों के घंटों विलंब से चलने के कारण लोगों को स्टेशन पर इंतजार करना पड़ रहा है। रविवार को कोरबा से यशवंतपुर जाने वाली एक्सप्रेस के करीब सात घंटे देरी से रवाना होने की सूचना से दक्षिण भारत की यात्रा करने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गईं।

सुबह 8 बजे की ट्रेन अब दोपहर 3 बजे
कोरबा से कर्नाटक के यशवंतपुर के लिए सुबह 8 बजे रवाना होने वाली एक्सप्रेस के दोपहर 3 बजे प्रस्थान करने की जानकारी दी गई। इससे यात्रियों को करीब सात घंटे अतिरिक्त इंतजार करना पड़ रहा है। लंबी दूरी की यात्रा में इस तरह की देरी से आगे की यात्रा की योजना, कनेक्टिंग ट्रेनों और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है।

परिवार के साथ सफर करने वाले यात्रियों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए स्टेशन पर घंटों इंतजार करना विशेष रूप से परेशानी भरा है।

इधर, शिवनाथ एक्सप्रेस और छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के परिचालन में भी लगातार दूसरे दिन विलंब की शिकायतें सामने आईं। स्थानीय यात्रियों का कहना है कि कम दूरी की रेल यात्रा में भी अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। करीब 100 किलोमीटर का सफर तय करने में चार घंटे से अधिक समय लगने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

माल परिवहन के साथ यात्री सुविधाओं पर भी ध्यान देने की मांग
कोरबा कोयला उत्पादन और परिवहन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां से बड़ी संख्या में मालगाड़ियों के जरिए कोयले का परिवहन होता है। यात्रियों का सवाल है कि औद्योगिक जरूरतों के साथ यात्री सेवाओं की समयबद्धता सुनिश्चित करना भी रेलवे की जिम्मेदारी है। यदि मालगाड़ियों के परिचालन के कारण यात्री ट्रेनों को बार-बार रोका जा रहा है या उनकी समय-सारणी प्रभावित हो रही है, तो रेलवे प्रबंधन को इसका समाधान तलाशना चाहिए।

नवरात्र और दशहरा के दौरान बड़ी संख्या में लोग धार्मिक स्थलों, रिश्तेदारों और दूसरे शहरों की यात्रा करते हैं। ऐसे समय में ट्रेनों का समय पर परिचालन जरूरी है। यात्रियों का कहना है कि रेलवे के मंत्री और अधिकारी यात्री सुविधाओं में सुधार की बात करते हैं, लेकिन ट्रेनों की देरी से उन्हें जमीनी स्तर पर राहत नहीं मिल पा रही है।

रेल मंत्री तक शिकायत पहुंचाने के बावजूद निराशा का आरोप
स्थानीय यात्रियों का आरोप है कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रेलवे प्रबंधन का ध्यान कोरबा क्षेत्र में यात्री ट्रेनों की लेटलतीफी की समस्या पर अपेक्षाकृत कम है। उनका कहना है कि स्वच्छता और अन्य सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों पर सोशल मीडिया के माध्यम से कई बार त्वरित कार्रवाई होती है, लेकिन यात्री ट्रेनों के विलंब और समय-सारणी में सुधार से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षित पहल नजर नहीं आती। यात्रियों ने मांग की है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेकर समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।

आखिर कब सुधरेगी ट्रेनों की समय-सारिणी?
कोरबा के रेल यात्रियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि ट्रेनों की लेटलतीफी से राहत कब मिलेगी। लोगों की मांग है कि रेलवे त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए यात्री ट्रेनों के परिचालन की नियमित समीक्षा करे, देरी के कारणों की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराए और समय-सारिणी सुधारने के लिए प्रभावी कदम उठाए।

कोयला परिवहन क्षेत्र की औद्योगिक जरूरत है, लेकिन आम यात्रियों के समय और सुविधा की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। रेलवे प्रबंधन को ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, जिसमें मालगाड़ियों का परिचालन सुचारु रहने के साथ यात्री ट्रेनों की समयबद्धता भी बनी रहे।