रामलीला के दूसरे दिन शोभिनव सत्य रहे आकर्षण का केंद्र, उद्योग मंत्री ने की पूजा-अर्चना

कोरबा। नगर पालिक निगम द्वारा आयोजित रामलीला के दूसरे दिन ओपन थिएटर में भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला। फिल्म हनुमान अंश के नायक शोभिनव सत्य आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहे। बाबा नीम करौली के किरदार से पहचान बनाने वाले शोभिनव ने मंच से ‘जय सीताराम’ का उद्घोष किया तो दर्शकों ने भी उत्साहपूर्वक उनका स्वागत किया। उन्होंने प्रेम, सेवा, जरूरतमंदों को भोजन कराने और राम नाम के महत्व पर जोर देते हुए लोगों से इन शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने की अपील की।

कार्यक्रम का शुभारंभ उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने श्रीरामलला की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना के साथ किया। इस अवसर पर महापौर संजूदेवी राजपूत, सभापति नूतन सिंह ठाकुर, नगर निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय, जुड़ावन सिंह ठाकुर, चन्द्रकिशोर श्रीवास्तव, भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी, डॉ. राजीव सिंह सहित मेयर इन काउंसिल के सदस्य, पार्षद और एल्डरमेन उपस्थित रहे।

प्रेम, सेवा और राम नाम का दिया संदेश
मंच से दर्शकों को संबोधित करते हुए शोभिनव सत्य ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए हनुमान जी और बाबा नीम करौली की शिक्षाएं प्रेरणादायी हैं। उन्होंने बाबा नीम करौली के संदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी से प्रेम करना और उनकी सेवा करना, भूखे को भोजन कराना तथा राम नाम का स्मरण करना जीवन में अपनाने योग्य प्रमुख शिक्षाएं हैं।

उन्होंने कहा कि यदि लोग इन मूल्यों को अपने जीवन में उतार लें, तो समाज की अनेक बुराइयों को दूर किया जा सकता है। शोभिनव सत्य ने रामलीला आयोजन में आमंत्रित करने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का आभार जताया। उन्होंने कोरबा से अपने जुड़ाव का उल्लेख करते हुए हर साल यहां आने का प्रयास करने की बात कही।

रामलीला के दूसरे दिन पुष्पवाटिका, धनुष यज्ञ, लक्ष्मण-परशुराम संवाद, राजतिलक और मंथरा-कैकेयी संवाद सहित रामायण के विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों ने संवाद और अभिनय के माध्यम से दर्शकों को रामकथा से जोड़े रखा।

आयोजन के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 17 अक्टूबर को राम वनगमन, केवट प्रसंग, दशरथ के देवलोक गमन और भरत मिलाप का मंचन रखा गया। 18 अक्टूबर को पंचवटी प्रसंग, सीता हरण, राम-हनुमान मिलन, राम-सुग्रीव मैत्री, बाली वध और लंका दहन जैसे प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे।

वहीं, 19 अक्टूबर को सेतु बंध, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति, मेघनाथ वध, रावण वध और श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ रामलीला का समापन होगा।