पारंपरिक वस्तुओं से सजा बालकोनगर का दुर्गा पूजा पंडाल, अतीत की यादें जीवंत

बालकोनगर। बालकोनगर के सेक्टर-3 स्थित दुर्गा पंडाल में नवरात्रि के अवसर पर मां आदिशक्ति की प्रतिमा की स्थापना हर्षोल्लास और भव्यता के साथ की गई। बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक राजेश सिंह ने पूजा-अर्चना कर उत्सव का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने बालको परिवार के सदस्यों के साथ मां दुर्गा की आराधना की और कंपनी सहित क्षेत्र की निरंतर प्रगति एवं समृद्धि की कामना की।

बालकोनगर का सार्वजनिक दुर्गा पूजा उत्सव पिछले 56 वर्षों से आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बना हुआ है। बालको सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति द्वारा 16 से 19 अक्टूबर तक आयोजित चार दिवसीय उत्सव में इस बार विशेष थीम के माध्यम से देश के अतीत और पारंपरिक जीवनशैली को जीवंत करने का प्रयास किया गया है।

पारंपरिक वस्तुओं से सजी अतीत की झलक
इस वर्ष दुर्गा पंडाल की सजावट में उस दौर की जीवनशैली को दर्शाया गया है, जब सीमित संसाधनों के बीच लोग अपनी दैनिक जरूरतें पूरी करते थे। पंडाल की आंतरिक सजावट में सूप, टोकरी, हाथ के पंखे, गमछे, बोरे और रोजमर्रा में उपयोग होने वाली अन्य पारंपरिक वस्तुओं को शामिल किया गया है। इन वस्तुओं के माध्यम से सादगीपूर्ण जीवन, संघर्ष और पुरानी परंपराओं को प्रस्तुत किया गया है।

यह थीम नई पीढ़ी को अतीत से जोड़ने के साथ ही भारतीय संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली को करीब से जानने का अवसर प्रदान करती है। पंडाल की सजावट श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

280 से अधिक तस्वीरों की प्रदर्शनी
दुर्गा पूजा उत्सव के अवसर पर पंडाल के समीप चार दिवसीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी भी लगाई गई है। इसमें बालको परिवार के सदस्यों द्वारा खींचे गए 280 से अधिक छायाचित्र प्रदर्शित किए गए हैं। तस्वीरों में बालकोनगर की प्राकृतिक सुंदरता, बादलों, बारिश, धरती और जीवन के विविध रंगों को कैमरे के माध्यम से खूबसूरती से उकेरा गया है।

प्रदर्शनी में प्रत्येक तस्वीर प्रकृति और आसपास की दुनिया को देखने का अलग नजरिया प्रस्तुत करती है। यह आयोजन बालको परिवार के सदस्यों को अपनी रचनात्मकता और फोटोग्राफी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच देने के साथ क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को सामने लाने का माध्यम भी बना है।

आस्था के साथ सामुदायिक एकता का उत्सव
बालकोनगर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान बन चुका यह दुर्गोत्सव हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। बालकोनगर सहित आसपास के क्षेत्रों से लोग मां दुर्गा के दर्शन और पंडाल की सजावट देखने पहुंच रहे हैं। चार दिवसीय आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ कला, परंपरा और सामुदायिक सहभागिता की झलक भी देखने को मिल रही है।

56 वर्षों से जारी यह परंपरा क्षेत्र के लोगों को आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक जुड़ाव के सूत्र में बांधने का काम कर रही है।