देह व्यापार मामले में महिलाएं बरी, हाईकोर्ट ने शासन की अपील की खारिज

हाईकोर्ट ने कहा स्वेच्छा से देह व्यापार करना अपने आप में अपराध नहीं, दूसरी महिला की कमाई पर जीवनयापन करने का आरोप साबित होना जरूरी

बिलासपुर/कोरबा। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरबा के महाराणा प्रताप नगर में देह व्यापार से जुड़े वर्ष 2013 के मामले में तीन महिलाओं को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा है। जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने राज्य शासन की अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि केवल स्वयं देह व्यापार में शामिल होने से अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 4 के तहत अपराध साबित नहीं होता। इस धारा के तहत दोषसिद्धि के लिए यह साबित करना आवश्यक है कि संबंधित व्यक्ति जानबूझकर किसी दूसरे के देह व्यापार से होने वाली कमाई पर जीवनयापन कर रहा था।

अदालत ने मामले में उपलब्ध तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर माना कि महिलाओं के खिलाफ धारा 4 के आवश्यक तत्व साबित नहीं हुए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि स्वेच्छा से देह व्यापार करना अपने आप में अपराध नहीं है। केवल इसी आधार पर किसी महिला को दंडित नहीं किया जा सकता।

2013 में मकान पर छापे के बाद दर्ज हुआ था मामला
मामले के अनुसार, 11 जुलाई 2013 को पुलिस को सूचना मिली थी कि कोरबा के महाराणा प्रताप नगर स्थित एक मकान में देह व्यापार कराया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नौ आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। प्रकरण में तीन महिलाओं के विरुद्ध अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 6 और 7 के तहत भी आरोप तय किए गए थे।

ट्रायल कोर्ट ने इन आरोपों से महिलाओं को बरी करते हुए धारा 4 के तहत दोषी ठहराया था। इसके बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक कोर्ट, कोरबा ने 28 अगस्त 2014 को धारा 4 के आरोप में भी तीनों महिलाओं को बरी कर दिया था। राज्य शासन ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

दूसरी महिला की कमाई पर निर्भरता साबित नहीं
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि महिलाओं पर किसी दूसरी महिला के देह व्यापार से होने वाली कमाई प्राप्त करने अथवा उसके लिए दलाल के रूप में काम करने का आरोप साबित नहीं हुआ। ऐसे में धारा 4 के तहत अपराध के लिए जरूरी कानूनी शर्तें पूरी नहीं हुईं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का स्वयं देह व्यापार में शामिल होना और किसी दूसरे व्यक्ति के देह व्यापार से होने वाली कमाई पर जीवनयापन करना दो अलग-अलग स्थितियां हैं। धारा 4 के तहत दोषसिद्धि के लिए दूसरी स्थिति से संबंधित आवश्यक तथ्यों और साक्ष्यों का होना जरूरी है।

राज्य शासन की अपील खारिज
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं पाया और राज्य शासन की अपील खारिज कर दी। इस निर्णय से तीनों महिलाओं को बरी किए जाने का फैसला बरकरार रहा।

अदालत की टिप्पणी का सार यह है कि देह व्यापार से जुड़े मामलों में केवल आरोप या किसी व्यक्ति की गतिविधि के आधार पर धारा 4 के तहत दोषसिद्धि नहीं की जा सकती।

संबंधित कानून के तहत अपराध के आवश्यक तत्वों का साक्ष्यों से साबित होना जरूरी है।