शारदा विहार रेलवे क्रॉसिंग की सड़क बदहाल, गड्ढों से हादसों का खतरा

बारिश ने खोली अस्थायी मरम्मत की पोल,भारी वाहनों की आवाजाही से बढ़ रही परेशानी

कोरबा।शहर के शारदा विहार रेलवे क्रॉसिंग के आसपास सड़क की बदहाली अब राहगीरों की सुरक्षा पर भारी पड़ने लगी है। क्रॉसिंग के ढलान वाले हिस्से में जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढे वाहन चालकों के लिए खतरा बन गए हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालकों को इस मार्ग से गुजरते समय संतुलन बनाए रखने में परेशानी हो रही है। गड्ढों के कारण वाहन चालकों के गिरने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। इसके बावजूद सड़क की मरम्मत के लिए स्थायी पहल नजर नहीं आ रही है। ऐसे में लोगों को आशंका है कि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो यह बदहाल सड़क किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है।

पानी से भरे गड्ढे, अंदाजा लगाना मुश्किल
शारदा विहार रेलवे क्रॉसिंग ऐसा मार्ग है, जहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। बारिश के बाद सड़क की हालत और बिगड़ गई है। गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। वाहन चालक जब तक गड्ढों को देख पाते हैं, तब तक कई बार संभलने का मौका नहीं मिलता। ऐसे में अचानक ब्रेक लगाने या वाहन को मोड़ने के दौरान संतुलन बिगड़ने का खतरा बना रहता है। रात के समय यह परेशानी और बढ़ जाती है। सड़क की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यहां तत्काल मरम्मत और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था किए जाने की जरूरत है।

महिला मंडल की पहल भी बारिश में बेअसर
क्रॉसिंग के आसपास सड़क की बदहाली कोई नई समस्या नहीं है। कुछ महीने पहले रेलवे ट्रैक के आसपास बने गड्ढों को भरने और लोगों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से शारदा विहार महिला मंडल ने अपने खर्च पर पहल की थी। महिला मंडल ने आम नागरिकों की सुरक्षा और संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अस्थायी व्यवस्था की थी। लेकिन बारिश के बाद यह प्रयास बेअसर साबित हुआ और सड़क पर फिर गड्ढे उभर आए। इससे स्पष्ट है कि अस्थायी उपायों से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग सड़क की वास्तविक स्थिति का आकलन कर टिकाऊ मरम्मत कराएं।

रेत परिवहन के भारी वाहनों से बढ़ रहा सड़क पर दबाव
सड़क की बदहाली के बीच भारी वाहनों की आवाजाही भी चिंता का विषय बनी हुई है। हसदेव नदी क्षेत्र से ट्रैक्टरों और हाईवा के माध्यम से दिनभर रेत का परिवहन इसी मार्ग से किया जाता है। लगातार भारी वाहनों के गुजरने से पहले से जर्जर सड़क पर दबाव बढ़ रहा है। इससे सड़क की हालत और खराब होने की आशंका बनी रहती है।

एक ओर आम नागरिकों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा नहीं मिल पा रही है, वहीं दूसरी ओर भारी वाहनों की आवाजाही परेशानी बढ़ा रही है। ऐसे में केवल गड्ढे भर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सड़क की मजबूती, नियमित रखरखाव और भारी वाहनों के आवागमन को व्यवस्थित करने पर भी ध्यान देना जरूरी है।


मालगाड़ियां गुजरती हैं, फिर सड़क की जिम्मेदारी किसकी?
इस रेलमार्ग से विद्युत कंपनी और बालको के लिए कोयले की आपूर्ति करने वाली मालगाड़ियां भी गुजरती हैं। इसके बावजूद स्थानीय लोगों के अनुसार, रेलवे का कहना है कि आसपास की सड़क उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती, इसलिए उसकी जिम्मेदारी नहीं बनती। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सड़क का इस्तेमाल आम नागरिक करते हैं और यहां दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है, तो इसकी मरम्मत की जिम्मेदारी आखिर किस विभाग की है?

सड़क की बदहाली को लेकर जिम्मेदारी तय नहीं होने का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। लोगों के लिए यह मायने नहीं रखता कि सड़क किस विभाग के अधीन है, बल्कि उनकी प्राथमिकता सुरक्षित आवागमन है।

ऐसे में संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ आगे आकर समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए। सड़क की मरम्मत में और देरी हुई तो राहगीरों की सुरक्षा को लेकर बनी चिंता किसी गंभीर दुर्घटना में बदल सकती है।