धान के साथ मूंगफली की खेती, किसान की आय में हुआ 8 हजार का इजाफा

पहले सिर्फ एक फसल पर निर्भर थे प्याजराम ,कृषि विभाग के बीज और तकनीकी मार्गदर्शन से अपनाई तिलहनी खेती

कोरबा।खेती में बदलाव और नई फसल को अपनाने से कोरबा विकासखंड के ग्राम ढेंगुरडी निवासी किसान प्याजराम राठिया की आमदनी में इजाफा हुआ है। 62 वर्षीय प्याजराम पहले केवल धान की खेती करते थे। कृषि विभाग से मिले मार्गदर्शन और बीज की मदद से उन्होंने धान के साथ मूंगफली की खेती शुरू की। पहली ही बार मूंगफली की खेती उनके लिए फायदेमंद रही और सालाना आय में करीब 8 हजार रुपये की बढ़ोतरी हुई।

42 हजार से बढ़कर 50 हजार हुई आय
ग्राम पंचायत सिमकेदा के आश्रित ग्राम ढेंगुरडी निवासी किसान प्याजराम राठिया, पिता होवल सिंह राठिया को एनएमईओ-खाने योग्य तिलहनी फसलों को बढ़ावा देने की योजना के तहत मूंगफली की खेती के लिए सहायता मिली।

उन्हें मूंगफली उत्पादन की वैज्ञानिक जानकारी, तकनीकी मार्गदर्शन और बीज उपलब्ध कराया गया।

योजना से पहले प्याजराम की अनुमानित वार्षिक आय करीब 42 हजार रुपये थी। मूंगफली की खेती शुरू करने के बाद यह बढ़कर लगभग 50 हजार रुपये हो गई। यानी उन्हें करीब 8 हजार रुपये की अतिरिक्त आय मिली।

नई फसल ने बढ़ाया भरोसा
प्याजराम बताते हैं कि पहले खेती में धान ही मुख्य फसल थी। मूंगफली की खेती का अनुभव उनके लिए नया था, लेकिन विभाग से मिले मार्गदर्शन से उन्हें फसल लेने में मदद मिली। पहली बार में ही बेहतर परिणाम मिलने से उनका खेती के प्रति भरोसा बढ़ा है।

उन्होंने बताया कि धान के साथ मूंगफली जैसी तिलहनी फसल लेने से अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिला है।

किसान ने योजना के माध्यम से सहयोग देने के लिए कृषि विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।

फसल विविधीकरण से आय बढ़ाने का प्रयास
कृषि विभाग की योजना का उद्देश्य किसानों को खाने योग्य तिलहनी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है।

प्याजराम राठिया का अनुभव इसी दिशा में फसल विविधीकरण के एक उदाहरण के रूप में सामने आया है।