सत्संग से पुष्ट होती है आत्मा: बागेश्वर सरकार धीरेंद्र शास्त्री

कोरबा। बागेश्वर पीठाधीश्वर आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा है कि जिस तरह शरीर को पुष्ट करने का काम भोजन करता है, उसी तरह आत्मा को हर हाल में मजबूत रखने के लिए भगवत भक्ति और सत्संग जरूरी है। इससे आत्मिक तत्वों का शुद्धिकरण होता है और ये व्यक्ति के आत्मबल को मजबूत करते हैं।

कोरबा जिले के बांकीमोंगरा अंतर्गत ढपढप में सेवा आश्रम की ओर से आयोजित 5 दिवसीय हनुमंत कथा के दूसरे दिन उन्होंने यह बात कही। संकट मोचन हनुमान की महिमा का वर्णन करते हुए धीरेंद्र कृष्ण ने कहा कि कई लोग यह सवाल करते हैं कि अगर एक बार कथा का श्रवण कर लिया है तो बार-बार क्यों? उन्हें पता होना चाहिए कि अगर आप रोज भोजन करते हैं तो भी आपको जरूरत लंबे समय तक के लिए पूरी नहीं हो पाती। इसलिए यही सिद्धांत आत्मा के लिए लागू होता है। उसे हर बार भगवान की कथा की जरूरत होती है। सोचने की बात है कि हम जितनी बार भी सत्संग में जाते हैं, हर बार नई दृष्टि मिलती है। इससे हमारी जिज्ञासा का बढ़ना स्वाभाविक है।

उन्होंने संकट मोचन हनुमान से संबंधित कई प्रसंगों पर रोशनी डाली। माता जानकी की खोज के लिए हनुमान के लंका प्रवास को लेकर उन्होंने कहा कि बजरंग बली ने अपनी युक्ति से काम लिया और अभियान को सफल किया। उन्हें अपने प्रभु से जो निर्देश मिले थे, उस पर तो काम किया ही गया। इसके अतिरिक्त हनुमान जी को अपने विवेक से जो उचित लगा, उस पर भी योजना क्रियान्वित की गई। इसलिए बजरंग बली को विद्या और विवेक के साथ-साथ अतुलित बल का स्वामी कहा गया है।

धीरेंद्र कृष्ण ने कहा कि भगवान श्रीराम की अपार कृपा उन्हें प्राप्त हुई और इसी के बल पर उन्होंने अनेक असुरों का संहार किया। आसुरी शक्तियों के विनाश के साथ सज्जन शक्ति की रक्षा करने का काम हनुमान हमेशा करते हैं, इसलिए कलयुग में उनकी उपासना करने वाला वर्ग बड़ी संख्या में है।